चतरा। भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण वन्य जीवों का रुख अब आबादी क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगा है। ऐसा ही एक मामला सदर प्रखंड के रक्सी गांव में सामने आया, जहां प्यास से व्याकुल एक मोर भटकते हुए गांव तक पहुंच गया।
मामले की जानकारी मिलते ही सदर प्रखंड के पारा लीगल वॉलेंटियर जुलकर नैन ने तत्परता दिखाते हुए सराहनीय कार्य किया। शाम के समय सैर के दौरान उनकी नजर जैसे ही राष्ट्रीय पक्षी पर पड़ी, उन्होंने बिना देर किए स्थिति को समझा और सावधानीपूर्वक मोर को सुरक्षित अपने संरक्षण में ले लिया। अगली सुबह उन्होंने वन विभाग को इसकी सूचना दी। विभाग के कर्मचारियों के सहयोग से मोर को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया। इस पूरे प्रयास से न केवल मोर की जान बच सकी, बल्कि उसे उसके प्राकृतिक वातावरण में लौटने का अवसर भी मिला। इस दौरान जुलकर नैन ने ग्रामीणों से महत्वपूर्ण अपील भी की। उन्होंने कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई और आगजनी की घटनाएं पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ रही हैं। इससे तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है और सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं, जिसका सबसे अधिक असर वन्य जीवों पर पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
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