तिसरी : कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन सूची पर उठे सवाल, जरूरतमंद बच्चियां हो रहीं वंचित

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज,...
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मनोज लाल बर्नवाल तिसरी

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में रोष, निष्पक्ष जांच की मांग

गिरिडीह। जिले के तिसरी प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नामांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विद्यालय में गरीब एवं जरूरतमंद परिवार की बच्चियों की जगह सफेदपोश और प्रभावशाली लोगों की बच्चियों का दाखिला कराया जा रहा है। इससे वास्तविक लाभुक छात्राएं कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन नहीं हो पा रही है जिसके कारण गरीब वर्ग के लड़की को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों एवं अभिभावकों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा गरीब, असहाय एवं पिछड़े वर्ग की बच्चियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि नामांकन प्रक्रिया में दलाल और बिचौलियों की भूमिका बढ़ गई है, जिसके कारण प्रभावशाली परिवारों को प्राथमिकता मिल रही है।

लोगों का कहना है कि कई गरीब परिवार अपनी बच्चियों के नामांकन के लिए विद्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सीट नहीं मिलने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों की बच्चियों का आसानी से नामांकन हो जाने की चर्चा क्षेत्र में हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा वास्तविक जरूरतमंद बच्चियों को प्राथमिकता देते हुए नामांकन सुनिश्चित कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।
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