भारी बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था की राह, बड़की बांध से मंदिर तक गूंजता रहा मां मनसा का जयकारा
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। प्रखंड क्षेत्र में गुरुवार को कलश यात्रा के साथ तीन दिवसीय मां मनसा पूजा का शुभारंभ हुआ। सुबह से ही पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल रहा। भारी बारिश के बावजूद आस्था और भक्ति का उत्साह कम नहीं हुआ। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु ढोल-ताशे और गाजे-बाजे की धुन पर विष्णुगढ़ के ऐतिहासिक बड़की बांध पहुंचे। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारी ने विधि-विधान से कलश में पवित्र जल भरा। इसके बाद श्रद्धालु कलश लेकर मां मनसा मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की।

कलश स्थापना और पूजा-अर्चना के बाद मध्य रात्रि में मंदिर का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया। पट खुलते ही मां मनसा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर में देर रात तक भक्तों की आवाजाही बनी रही। पूरा क्षेत्र मां मनसा के जयकारे और धार्मिक वातावरण से भक्तिमय नजर आया।
गांव-गांव में स्थापित हुईं मां मनसा की प्रतिमाएं
मां मनसा पूजा को लेकर प्रखंड के विभिन्न गांवों में भी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। जगह-जगह पूजा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तीन दिनों तक क्षेत्र में भक्तिमय माहौल रहने की उम्मीद है।
पुराना मनसा मंदिर में निभाई जा रही वर्षों पुरानी परंपरा
विष्णुगढ़ के पुराना मां मनसा मंदिर में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। इस मंदिर की पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। परंपरा के अनुसार मंदिर में नागों का दर्शन कराया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नागों का दर्शन कर नमन करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा अर्पित करते हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार मां मनसा से मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा बकरे की बलि देने की परंपरा भी रही है। इसके अलावा बच्चों का मुंडन संस्कार कराने की परंपरा भी यहां निभाई जाती है।
1953 में रखी गई थी मंदिर की नींव
बताया जाता है कि विष्णुगढ़ में मां मनसा पूजा की शुरुआत सबसे पहले पुराना मां मनसा मंदिर से हुई थी। वर्ष 1953 में मेघलाल कान्दू, धुपल कान्दू और भून मिश्रा द्वारा मंदिर की नींव रखे जाने की बात स्थानीय लोगों द्वारा बताई जाती है। तब से यहां मां मनसा पूजा की परंपरा लगातार चली आ रही है।
करीब 72 वर्षों से तीन पीढ़ियों से मेघलाल कान्दू के वंशज इस पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाते आ रहे हैं। उनके वंशजों में भीखी कान्दू, धनेश्वर कान्दू, बैजनाथ कान्दू, हरी कान्दू, राजू कान्दू और निर्मल कान्दू समेत अन्य लोग पूजा की परंपरा से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में भीखी कान्दू द्वारा मां मनसा पूजा कराई जा रही है।
शनिवार को होगा प्रतिमा विसर्जन
तीन दिवसीय मां मनसा पूजा का समापन शनिवार को मां मनसा देवी की प्रतिमा के विसर्जन के साथ होगा। पूजा को सफल बनाने में महेंद्र कान्दू, बबलू कुमार, सूरज कुमार, भोला प्रसाद, रंजीत मिश्रा, कुंदन कान्दू, अजय कुमार, राहुल कुमार, राजेश कान्दू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
भारी बारिश के बीच भी पूजा को लेकर श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र देर रात तक मां मनसा के जयकारों से गूंजता रहा।
इसे भी पढ़े: तीन दिन की बारिश से थमी विष्णुगढ़ की रफ्तार, बाजारों में पसरा सन्नाटा









