तिसरी-गांवा के जंगलों में अवैध माइका खनन का खेल जारी, प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा कारोबार

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज,...
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प्रतीकात्मक चित्र: यह थंबनेल AI की सहायता से तैयार किया गया है।

गिरिडीह मनोज लाल बर्नवाल गिरिडीह जिले के तिसरी, धनवार और गावां प्रखंड के जंगलों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध माइका खनन का कारोबार एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में माइका निकालकर गिरिडीह और कोडरमा के बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। इस कारोबार में बड़ी संख्या में बिचौलिये और तस्कर सक्रिय बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक जंगलों में दिनभर मजदूर माइका चुनने और निकालने का काम करते हैं। शाम होते ही स्थानीय स्तर पर इसकी खरीद-बिक्री शुरू हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों को माइका का उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जबकि बाजार तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। इससे अवैध कारोबार से जुड़े लोगों को मोटा मुनाफा होता है।

जंगलों और पहाड़ियों में सक्रिय हैं तस्कर

स्थानीय लोगों के अनुसार तिसरी प्रखंड के हथियागढ़, फुलवार घाटी, कुसमाटांड़, खटपोंक, गड़कुरा,नीमा और तिसरो समेत कई इलाकों में अवैध खनन का काम जारी है। दुर्गम जंगलों और पहाड़ियों में होने के कारण इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया जंगलों के भीतर अस्थायी भंडारण केंद्र बनाकर माइका जमा करते हैं और मौका मिलते ही वाहनों के माध्यम से बाहर भेज देते हैं। कई बार प्रशासनिक जांच की भनक लगते ही तस्कर अपने रास्ते बदल लेते हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों का उठाया जा रहा फायदा

धनवार और गावां प्रखंड की सीमाएं कोडरमा जिले से जुड़ी होने के कारण तस्करों को आवागमन में सहूलियत मिल रही है। सूत्र बताते हैं कि सीमा क्षेत्र के कई गांवों से माइका निकालकर कोडरमा की ओर भेजा जाता है, जहां से आगे विभिन्न बाजारों तक इसकी सप्लाई होती है।

कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रहा अवैध खनन

वन विभाग और प्रशासन द्वारा समय-समय पर छापेमारी एवं कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद अवैध खनन और तस्करी की गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हो सकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की जाए तो इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

क्षेत्र में बढ़ते अवैध खनन को लेकर लोगों ने प्रशासन से सघन जांच अभियान चलाने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर रोक लग सके।

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।
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