उत्क्रमित मध्य विद्यालय व उच्च विद्यालय तिसरी-बरमसिया की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, कैबिनेट से हस्तांतरित 5 एकड़ भूमि भी कब्जे की जद में
तिसरी मनोज लाल बर्नवाल (Giridih): तिसरी प्रखंड में सरकारी विद्यालयों की बहुमूल्य भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने गिरिडीह उपायुक्त को पत्र अग्रसारित करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने तथा विद्यालयों की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया है।
यह मामला झामुमो युवा मोर्चा के तिसरी प्रखंड अध्यक्ष अफसर हुसैन द्वारा मंत्री को सौंपे गए शिकायती पत्र के बाद सामने आया। शिकायत में तिसरी क्षेत्र के दो सरकारी विद्यालयों की जमीन पर भू-माफियाओं एवं स्थानीय दबंगों द्वारा कब्जा किए जाने का आरोप लगाया गया है।
भुरंगोडीह विद्यालय की दान की गई जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायत के अनुसार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय भुरंगोडीह को पूर्व में विधिवत रजिस्टर्ड दानपत्र के माध्यम से भूमि उपलब्ध कराई गई थी। आरोप है कि विद्यालय का पुराना भवन ध्वस्त होने के बाद असामाजिक तत्वों ने अवसर का लाभ उठाते हुए विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा जमा लिया। इससे विद्यालय के भविष्य के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
उच्च विद्यालय तिसरी-बरमसिया की जमीन पर भी अतिक्रमण का आरोप
शिकायती पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन बिहार सरकार के समय उच्च विद्यालय तिसरी-बरमसिया के लिए रजिस्ट्री डीड के माध्यम से भूमि दान की गई थी। आरोप है कि वर्षों से इस जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया, जबकि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में स्थानीय अंचल कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
कैबिनेट से हस्तांतरित 5 एकड़ सरकारी भूमि भी कब्जे की जद में
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया है कि 18 अगस्त 2004 को राज्य मंत्रिपरिषद के निर्णय के तहत मौजा मोदीबीघा, खाता संख्या-02, प्लॉट संख्या-233 की 5.00 एकड़ सरकारी भूमि भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग से मानव संसाधन विकास विभाग को विद्यालय के लिए हस्तांतरित की गई थी। आरोप है कि विभागीय स्तर पर समय पर चहारदीवारी नहीं बनने के कारण इस सरकारी भूमि पर भी स्थानीय लोगों ने कब्जा कर लिया।
नापी नहीं होने से बढ़े अतिक्रमण के आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 28 फरवरी 2022 को आदेश पत्रांक-80 के तहत भूमि की मापी कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन तत्कालीन अमीन द्वारा मापी नहीं कराई गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसी लापरवाही का लाभ उठाकर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा और मजबूत कर लिया।
मंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निर्देश के बाद जिला प्रशासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि उपायुक्त के निर्देश पर संबंधित विभागों द्वारा जांच कराई जाएगी और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अतिक्रमण हटाने तथा दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
इधर, स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालयों की जमीन को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि भविष्य में विद्यालयों के विस्तार, खेल मैदान और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विकास में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
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