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गिरिडीह: सरकारी जमीन पर अवैध खनन की पुष्टि, फिर भी कार्रवाई नहीं; जमुआ के बदडीहा-2 में प्रशासन पर उठे सवाल

Published: Jul 4, 2026 10:46 AM  •  Updated: Jul 4, 2026 10:46 AM
HIGHLIGHTS
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गिरिडीह मनोज लाल बर्नवाल: जिले के जमुआ प्रखंड के अंतर्गत बदडीहा-2 पंचायत में गैर-मजरुआ सरकारी भूमि पर कथित अवैध पत्थर खनन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। खास बात यह है कि अंचल प्रशासन की जांच में सरकारी भूमि पर खनन किए जाने की पुष्टि होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोग प्रशासन की कार्यशैली और कार्रवाई में हो रही देरी पर सवाल उठा रहे हैं।

बदडीहा-2 निवासी एवं दिव्यांग देवनंदन राय ने उपायुक्त गिरिडीह को दिए आवेदन में बताया कि उनकी शिकायत पर अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षक और राजस्व कर्मचारी द्वारा संयुक्त जांच कराई गई थी। जांच के बाद अंचल अधिकारी, जमुआ ने पत्रांक-549, दिनांक 16 मई 2026 के माध्यम से अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन और जिला खनन पदाधिकारी को भेजी।

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि स्वीकृत लीज क्षेत्र से अलग प्लॉट संख्या-59 की गैर-मजरुआ खास सरकारी भूमि के लगभग 90 डिसमिल हिस्से में खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकारी जांच में ही नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो चुकी है तो आखिर अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

देवनंदन राय ने आरोप लगाया कि खदान क्षेत्र में लगातार ब्लास्टिंग की जा रही है तथा पत्थर लदे हाइवा वाहनों का दिन-रात परिचालन हो रहा है। इससे खेत, ग्रामीण सड़कें और सार्वजनिक रास्ते क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार विस्फोट होने से आसपास के कई घरों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में रहने को विवश हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उक्त खदान का संचालन कोडरमा निवासी धनंजय मेहता और बदडीहा-2 निवासी विकास राय की साझेदारी में किया जा रहा है। देवनंदन राय ने कहा कि दिव्यांग होने के बावजूद वे न्याय की उम्मीद में लगातार विभागीय कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने उपायुक्त के अलावा जिला खनन पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी, खोरीमहुआ को भी आवेदन देकर अवैध खनन रोकने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इसके बावजूद खनन कार्य जारी रहने से प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इधर गांव के निवासी अभिमन्यु राय ने भी आरोप लगाया कि जिस स्थान पर खनन किया जा रहा है वह सरकारी भूमि है और स्वीकृत लीज क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि खनन के दौरान मत्स्य विभाग द्वारा करीब सात वर्ष पूर्व लगभग 10 लाख रुपये की लागत से निर्मित एक तालाब को भी मिट्टी-पत्थर डालकर भर दिया गया। उनके अनुसार यह तालाब रंजीत राय के नाम से विभागीय योजना के तहत बनाया गया था और ग्रामीणों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत था।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि खनन के कारण सरकारी तालाब को नुकसान पहुंचा है तो यह केवल सरकारी संपत्ति की क्षति नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका पर भी सीधा प्रहार है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और झारखंड सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, सरकारी भूमि पर हुए कथित अवैध खनन की निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने, सरकारी भूमि एवं तालाब को हुए नुकसान का आकलन कराने तथा क्षतिपूर्ति की राशि वसूलने की मांग की है।

वहीं, इस संबंध में खदान संचालक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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