विश्व होम्योपैथी दिवस पर डॉ. ओझा एंड सन्स का संदेश, समग्र चिकित्सा पद्धति पर दिया जोर

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विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर डॉ. ओझा एंड सन्स ने सभी मरीजों, चिकित्सकों और होम्योपैथी से जुड़े लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। इस मौके पर संस्था ने होम्योपैथी के महत्व और उसके बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला।

संस्था की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की स्थापना 18वीं शताब्दी में जर्मनी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनिमैन ने की थी। यह “समः समं शमयति” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि जिस पदार्थ से रोग के लक्षण उत्पन्न होते हैं, वही पदार्थ उचित मात्रा में उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।

विज्ञप्ति में कहा गया कि होम्योपैथी केवल रोग के लक्षणों का इलाज नहीं करती, बल्कि मरीज के संपूर्ण व्यक्तित्व शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपचार करती है। यही कारण है कि इसे एक समग्र और व्यक्तिगत चिकित्सा पद्धति माना जाता है।

संस्था के अनुसार, वर्तमान समय में होम्योपैथी एक सुरक्षित, प्रभावी और विश्वसनीय चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुकी है। भारत में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और यह तीव्र (acute) तथा दीर्घकालिक (chronic) रोगों के उपचार में प्रभावी साबित हो रही है। यह शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर स्थायी स्वास्थ्य प्रदान करने में सहायक है।

डॉ. ओझा एंड सन्स ने कहा कि वे शुद्ध शास्त्रीय होम्योपैथी के सिद्धांतों का पालन करते हुए अपने मरीजों को व्यक्तिगत और संवेदनशील उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संस्था ने अपने मरीजों के विश्वास और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

अंत में, संस्था ने होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानव सेवा के अपने संकल्प को दोहराते हुए सभी को विश्व होम्योपैथी दिवस की शुभकामनाएं दीं।

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