500 एकड़ के जंगल की रक्षा का संकल्प, 168 प्रजातियों के पेड़ों को ग्रामीणों ने बांधी राखी
वन रक्षाबंधन महोत्सव की 24वीं वर्षगांठ पर उमड़ा प्रकृति प्रेम, चांदनाथ भाई पटेल बोले—ग्लोबल वार्मिंग और बदलता मौसम खतरे की घंटी
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। जंगल बचेंगे, तभी जीवन बचेगा। इसी संदेश के साथ भेलवारा क्षेत्र के पत्थलचुआं जंगल में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। वन रक्षाबंधन महोत्सव की 24वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों और प्रकृति प्रेमियों ने करीब 500 एकड़ में फैले जंगल में मौजूद 168 प्रजातियों के पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले का भी आयोजन हुआ, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए।
पेड़ों को राखी बांधकर लिया रक्षा का वचन
महोत्सव में रक्षा बंधन की परंपरा को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधा गया। ग्रामीणों ने संदेश दिया कि जिस तरह राखी रिश्तों की रक्षा का प्रतीक है, उसी तरह पेड़ों की सुरक्षा भी हर व्यक्ति का दायित्व है। जीवनदायिनी हवा, छाया और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने वाले वृक्षों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है।
कार्यक्रम के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता चांदनाथ भाई पटेल ने कहा कि “आज ग्लोबल वार्मिंग और बदलता मौसम हमारे लिए खतरे की घंटी है।” उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना और मौजूदा जंगलों को बचाना जरूरी है। हमारी संस्कृति हमेशा से प्रकृति की उपासक रही है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल नारे तक सीमित न रखकर इसे अपने व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।
पौधे लगाना ही नहीं, उन्हें बचाना भी जरूरी
सभा में वक्ताओं ने युवाओं और ग्रामीणों से अपील की कि वे पौधरोपण के साथ उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएं। केवल पौधे लगा देने से पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं होगा, बल्कि उन्हें नियमित पानी देने, सुरक्षित रखने और पेड़ बनने तक देखभाल करने की जरूरत है। जंगलों की हरियाली कायम रहेगी, तभी प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।
ग्रामीणों की एकजुटता ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
महोत्सव में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की भागीदारी ने जंगल बचाने के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने करीब 500 एकड़ में फैले पत्थलचुआं जंगल को हरा-भरा, स्वच्छ और सुरक्षित रखने तथा वहां मौजूद 168 प्रजातियों के पेड़ों की रक्षा करने का संकल्प लिया।
पत्थलचुआं का वन रक्षाबंधन महोत्सव इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि प्रकृति की रक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा कर्तव्य है। पेड़ों को राखी बांधने की यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जंगलों को बचाने की सामूहिक पहल बनकर उभरी।







