चौपारण (हजारीबाग)। चौपारण प्रादेशिक वन प्रक्षेत्र की वनभूमि पर चल रहे चेक डैम निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। निर्माण स्थल पर योजना संबंधी सूचना पट्ट नहीं लगाए जाने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि योजना की लागत, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी और कार्य अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक नहीं होने से कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की विकास योजनाओं में सूचना पट्ट लगाना एक अनिवार्य प्रक्रिया है, ताकि आम जनता को योजना की पूरी जानकारी मिल सके और कार्यों की निगरानी भी हो सके। लेकिन संबंधित चेक डैम निर्माण स्थल पर अब तक किसी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे लोगों को यह तक पता नहीं चल पा रहा है कि योजना किस मद से संचालित हो रही है और उस पर कितनी राशि खर्च की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राशि से किए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। सूचना पट्ट नहीं होने के कारण ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कार्य पूरी तरह नियमों के अनुरूप कराया जा रहा है तो योजना की जानकारी सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना के अभाव में स्थानीय लोगों की भागीदारी और निगरानी की भूमिका कमजोर हो रही है। इससे योजना के क्रियान्वयन को लेकर संदेह की स्थिति बन रही है। लोगों का मानना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सूचना पट्ट लगाना जरूरी है।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग के वरीय अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने निर्माण स्थल पर अविलंब सूचना पट्ट लगाने तथा योजना से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
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