जितिआ परब पर दिन-रात तपती रहीं माताएं, संतान की लंबी उम्र के लिए रखा निर्जला व्रत
शनिवार को उपवास, रविवार सुबह विधि-विधान से हुआ पारण, गांवों में आस्था के साथ लोक संस्कृति की दिखी रंगीन छटा
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। प्रखंड में शनिवार को जितिआ परब श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर माताओं ने पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखकर कठिन व्रत किया। रविवार की सुबह विधि-विधान के साथ पारण कर माताओं ने व्रत पूरा किया।
जितिआ परब को लेकर प्रखंड के विभिन्न गांवों में शनिवार सुबह से ही उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा। व्रती माताओं ने अन्न और जल का त्याग कर पूरे दिन उपवास रखा। शाम और रात में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार जितिआ माता की पूजा-अर्चना की गई। पूजा के दौरान माताओं ने अपनी संतानों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
रविवार सुबह हुआ पारण
रविवार की सुबह व्रती महिलाओं ने विधि-विधान के साथ पारण किया। अन्न-जल ग्रहण करने के साथ उनका निर्जला व्रत संपन्न हुआ। लंबे समय तक उपवास के बाद पारण के दौरान भी पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों का पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया गया।
लोक संस्कृति से सजे गांव
जितिआ परब के अवसर पर प्रखंड के गांवों में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति का भी सुंदर संगम देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य, ढोल-मांदर और झूमर के माध्यम से अपनी समृद्ध लोक परंपरा की मनमोहक छटा बिखेरी। कई स्थानों पर देर रात तक गीत-संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का दौर चलता रहा।
जितिआ परब ने एक बार फिर ग्रामीण समाज की गहरी आस्था और सामुदायिक एकजुटता को सामने रखा। माताओं की श्रद्धा, ग्रामीणों की सहभागिता और पारंपरिक लोक संस्कृति से गांवों का वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा। पर्व के माध्यम से महिलाओं ने अपनी आस्था के साथ पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखा।








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