विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। प्रखंड के बनासो में स्थित दौलत महतो मेमोरियल शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में सोमवार को कर्मा महोत्सव हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। प्रकृति, लोकसंस्कृति तथा भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक कर्मा पर्व को लेकर महाविद्यालय परिसर में पूरे दिन उत्सवी माहौल बना रहा। आयोजन के माध्यम से शिक्षक-प्रशिक्षुओं को अपनी समृद्ध लोकपरंपरा, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ जुड़ाव का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज एवं सांस्कृतिक वातावरण के बीच दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद कर्मा पर्व की सांस्कृतिक और सामाजिक महत्ता पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में शामिल शिक्षक एवं शिक्षक-प्रशिक्षुओं ने कर्मा पर्व की परंपराओं और इसके पीछे निहित प्रकृति संरक्षण तथा पारिवारिक स्नेह के भाव को समझा।
लोकपर्व संस्कृति को पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्या, आईक्यूएसी कॉर्डिनेटर एवं एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. कुमारी स्वर्णा मिश्र ने कहा कि हमारे लोकपर्व केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं। इनके माध्यम से समाज की संस्कृति, परंपरा, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य होता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक-प्रशिक्षु भविष्य में विद्यार्थियों के मार्गदर्शक होंगे। इसलिए उनका दायित्व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे लोकपर्वों के महत्व को समझें और इनके सकारात्मक संदेश को भावी विद्यार्थियों तक पहुंचाएं।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ने का संदेश
डॉ. स्वर्णा मिश्र ने कहा कि कर्मा पर्व प्रकृति और मानव जीवन के बीच के संबंध को दर्शाता है। बदलते समय में लोकपरंपराओं को संरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान और जड़ों से जुड़ी रहे। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है और सामाजिक एकजुटता को भी मजबूती मिलती है।
कर्मा महोत्सव के आयोजन से महाविद्यालय के शिक्षक-प्रशिक्षुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे परिसर में पारंपरिक और सांस्कृतिक माहौल बना रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ये रहे मौजूद: कार्यक्रम में एचओडी बबली कुमारी, डॉ. ओमकार नाथ शर्मा, वीरेंद्र देव, राघवेंद्र प्रताप, डॉ. सतीश चंद यादव, अशोक कुमार झा, सरोज श्रीवास्तव, राजेश कुमार बर्मा, प्रवीण कुमार जायसवाल, विपिन कुमार, जितेंद्र कुमार, अदृश मुखर्जी, जयपाल राणा, डॉ. अम्बरीश कुमार दुबे, डॉ. विजयकांत चक्रवर्ती, सीमा, अजीत कुमार, भुवनेश्वर कुमार महतो, डॉ. कुमारी मेधा, संतोष कुमार, विनोद कुमार, धर्मनाथ महतो, सौरभ सुमन, प्रीती, पूनम हेमब्रम, राहुल, आजाद, नाजरा एवं सुनीता सहित बीएड और डीएलएड संकाय के शिक्षक-प्रशिक्षु मौजूद रहे।
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