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गिरिडीह: गरीबों की थाली में ‘कीड़ों वाली मेहरबानी’! खराब चना दाल बांटने की तैयारी का आरोप, कार्डधारियों में आक्रोश

Published: Aug 26, 2026 11:39 PM  •  Updated: Aug 26, 2026 11:39 PM
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तिसरी (गिरिडीह) /मनोज लाल बर्नवाल: तिसरी प्रखंड में सरकारी राशन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। तिसरी स्थित जेएसएफसी गोदाम में लंबे समय से रखी करीब 31.58 क्विंटल चना दाल में कीड़े लगने और दाल खराब होने के बावजूद उसे राशन दुकानों के माध्यम से कार्डधारियों के बीच वितरण के लिए भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों और कार्डधारियों में भारी नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार, 7 अगस्त को झामुमो प्रखंड अध्यक्ष रिंकू वर्णवाल ने जेएसएफसी गोदाम का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान गोदाम में रखी चना दाल की गुणवत्ता खराब पाए जाने का आरोप लगाया गया था। उस समय भी सवाल उठाया गया था कि समय पर वितरण नहीं होने के कारण सरकारी खाद्यान्न गोदाम में ही खराब हो रहा है।

बताया जा रहा है कि मामले को लेकर खबर सामने आने के बाद उम्मीद थी कि खराब दाल को हटाकर उसकी गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। लेकिन अब आरोप है कि इसके विपरीत खराब दाल को राशन दुकानदारों के माध्यम से कार्डधारियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

डीलरों ने जताई आपत्ति

भंडारी पंचायत के कुछ राशन डीलरों का आरोप है कि खराब दाल को वाहनों में लोड कराकर भेजा गया। डीलरों के अनुसार, उन्होंने दाल की स्थिति को देखते हुए उसे लेने में आपत्ति जताई। आरोप है कि इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया रोकने की बात कही गई। बाद में दाल को ऑनलाइन भी कर दिया गया।

डीलरों का कहना है कि यदि दाल पहले से खराब है और उसमें कीड़े लग चुके हैं, तो उसे गरीब परिवारों के बीच वितरण के लिए कैसे उपयुक्त माना जा सकता है।

मुखिया सह भाकपा माले नेता ने एमओ से मांगी जानकारी

भंडारी पंचायत के मुखिया पिंकेश सिंह ने मामले को लेकर एमओ अभिजीत कुमार से फोन पर जानकारी लेने की बात कही है। उनके अनुसार, एमओ की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि “ऊपर से जैसा आदेश आएगा, वैसा किया जाएगा।” वहीं, एक कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर दावा किया कि दाल वितरण को लेकर निर्देश डीएसओ स्तर से दिया गया था।

हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

कार्डधारियों ने उठाए स्वास्थ्य सुरक्षा पर सवाल

ग्रामीणों और कार्डधारियों का कहना है कि सरकारी राशन का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। यदि दाल खराब हो चुकी है तो उसका वितरण गरीबों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब गोदाम में रखी दाल की खराब स्थिति की जानकारी सामने आ चुकी थी, तो उसके वितरण से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं कराई गई। लोगों ने खराब दाल का वितरण तत्काल रोकने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गोदाम में रखी चना दाल की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए, खराब पाए जाने पर उसके वितरण पर रोक लगाई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि खाद्यान्न खराब होने के बावजूद उसे वितरण योग्य घोषित करने की प्रक्रिया किस स्तर पर हुई।

अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और गरीब कार्डधारियों को मिलने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते

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