चौपारण में हनुमान मंदिर की जमीन पर कब्जे का आरोप, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया अंचल कार्यालय का घेराव

चौपारण के सिंघरावां में हनुमान मंदिर की जमीन पर कब्जे के आरोप को लेकर ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय का घेराव किया। मामले को लेकर जांच, दस्तावेज सत्यापन और कार्रवाई की मांग की गई...

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज,...
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मंदिर भूमि विवाद पर ग्रामीणों का प्रदर्शन

विवाद के कारण एनएच-2 के चौड़ीकरण और मंदिर निर्माण का काम ठप

चौपारण (हजारीबाग)। प्रखंड के सिंघरावां गांव में हनुमान मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय, चौपारण का घेराव किया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही दामोदर साव, कमलेश साव और विनोद साव, सभी के पिता स्व. रघु साव ने भगवान की जमीन को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण हनुमान मंदिर के पुनर्निर्माण का काम रुका हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग के सिक्स-लेन और सर्विस रोड का निर्माण कार्य भी पूरी तरह बाधित है। सीओ को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने इस मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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क्या है मामला:

ग्रामीणों के अनुसार, मौजा सिंघरावां के खाता संख्या 56, प्लॉट संख्या 1655 और 1656, कुल रकबा 15 डिसमिल जमीन मूल रूप से चुल्हिया मसोमात, पति स्व. गोपाल साव के नाम पर दर्ज थी। चुल्हिया मसोमात निःसंतान थीं और उनका कोई वारिस नहीं था। इसलिए उन्होंने अपने जीवनकाल में ही यह जमीन हनुमान मंदिर के लिए मौखिक रूप से दान कर दी थी। इसके बाद पूर्वजों और ग्रामीणों के सहयोग से वहां हनुमान मंदिर का निर्माण कराया गया था, जो आज भी कायम है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की परंपरा के अनुसार गांव के सभी मंदिर मौखिक दान की भूमि पर ही बने हैं।

भू-अर्जन के पंचाट में भी दर्ज है मंदिर का नाम:

विवाद की मुख्य वजह एनएच का सिक्स-लेन चौड़ीकरण है। सड़क निर्माण के दौरान मंदिर की कुछ भूमि का अधिग्रहण किया गया है। भू-अर्जन कार्यालय द्वारा जारी पंचाट संख्या 78 में भी स्पष्ट रूप से इस जमीन को चुल्हिया मसोमात हनुमान मंदिर के नाम से ही दशार्या गया है और मुआवजा राशि का निर्धारण भी इसी आधार पर हुआ है।

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पूर्व मुखिया प्रतिनिधि सुरेश साव ने कहा कि मंदिर की भूमि पर अवैध दावा करके न केवल ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है, बल्कि विकास कार्यों को भी बाधित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो ग्रामीण व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब ग्रामीणों की निगाह अंचल प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।
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