राँची: वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम प्रक्रियात्मक निर्देश जारी किया है. अदालत ने उन सभी आवेदकों को नई स्वतंत्र रिट याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दे दी है, जिनकी याचिकाओं को पहले ‘इंटरलोकुटरी एप्लीकेशन’ यानी मध्यवर्ती आवेदनों में बदल दिया गया था. न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने मामले (‘इन री: द वक्फ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2025’) की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया.
जानें अदालत में क्या हुआ?
अप्रैल 2025 के आदेश के अनुसार, केवल 5 याचिकाओं (अर्शद मदनी, मोहम्मद जमील मर्चेंट, मोहम्मद फजलुर्रहीम, शेख नूरुल हसन और असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर) को मुख्य याचिका माना गया था, जबकि लगभग 135 अन्य याचिकाओं को IA (इंटरवेनर) में बदल दिया गया था. वरिष्ठ वकील डॉ. मोहन गोपाल और अन्य वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि केवल 5 मुख्य याचिकाएं चुनौती के सभी कानूनी और संवैधानिक आधारों को कवर नहीं करती हैं. उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेश के कारण उन्हें मध्यस्थ बनने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जिससे वे अपने पूरे तर्क कोर्ट के सामने नहीं रख पा रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आवेदकों को अंतिम सुनवाई के लिए केवल ‘इंटरवेनर’ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. पीठ ने निर्देश दिया कि आवेदक दो सप्ताह के भीतर अपनी स्वतंत्र रिट याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं. सभी पक्ष 31 दिसंबर, 2026 तक अपने जवाब, हलफनामे और प्रत्युत्तर (rejoinders) पूरे करें. इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 के दूसरे सप्ताह में होगी.

वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 और विवाद का कारण
अप्रैल 2025 में लागू हुए इस नए कानून के तहत मूल अधिनियम का नाम बदलकर “एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995” कर दिया गया है. इस अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21, 25, 26, 29, 30 और 300A के उल्लंघन के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सितंबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. लेकिन कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जैसे कि वक्फ बनाने के लिए पांच साल तक इस्लाम का पालन करने की अनिवार्यता और केंद्रीय वक्फ परिषद व राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या तय करने जैसे नियम.





