विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। लोक आस्था का महापर्व छठ नजदीक है, लेकिन विष्णुगढ़, चेडरा और रमुआ पंचायत की कई गलियों में गंदगी और जलजमाव से हालात बदतर हैं। सड़कों पर बहता नालियों का गंदा पानी, जगह-जगह जमा कीचड़ और दुर्गंध से लोगों का जनजीवन प्रभावित है। विडंबना यह है कि छठ जैसे पवित्र पर्व से पहले भी सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त होती नजर नहीं आ रही है। स्वच्छ भारत मिशन के दावों के बीच जमीनी स्थिति व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई घरों में पनसोखा होने के बावजूद लोग घरों का गंदा पानी सीधे सड़कों पर बहा रहे हैं। समुचित नाली व्यवस्था नहीं होने से पीसीसी सड़कें नाली में तब्दील हो गई हैं। लगातार पानी बहने से सड़कों पर काई जम गई है और फिसलन का खतरा बना रहता है। लोगों के अनुसार, यह समस्या बरसात तक सीमित नहीं, बल्कि सालोंभर बनी रहती है।
सड़क पर गंदा पानी, लोगों का निकलना मुश्किल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जमा गंदे पानी से उठती दुर्गंध ने आसपास रहने वालों की परेशानी बढ़ा दी है। राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए इन रास्तों से गुजरना चुनौती बना हुआ है। जलजमाव के कारण मच्छरों के पनपने और संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं दिख रही है।
जमुनिया घाट जाने वाले रास्ते भी बदहाल
छठ महापर्व के दौरान जमुनिया घाट पर बड़ी संख्या में व्रती और श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऐसे में घाट तक जाने वाले रास्तों पर गंदा पानी, कीचड़ और फिसलन चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छठ की तैयारी केवल घाटों की सफाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। व्रतियों और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों की सफाई तथा मरम्मत भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
वर्षों पुरानी समस्या, स्थायी समाधान का इंतजार
ग्रामीणों ने प्रशासन, संबंधित विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों से छठ से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने, नालियों की सफाई कराने, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने और जर्जर सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पर्व के दौरान एक-दो दिन सफाई कराकर औपचारिकता निभाने से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए नियमित सफाई और स्थायी जलनिकासी व्यवस्था जरूरी है।
अब प्रशासन की जवाबदेही
छठ महापर्व से पहले प्रशासन के सामने घाटों की सफाई के साथ श्रद्धालुओं के रास्तों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की भी जिम्मेदारी है। सवाल है कि वर्षों से गंदगी और जलजमाव झेल रहे विष्णुगढ़, चेडरा और रमुआ के लोगों को इस बार राहत मिलेगी या फिर व्रतियों को बदहाल रास्तों से ही घाट तक पहुंचना पड़ेगा? अब प्रशासन की तत्परता और जवाबदेही की परीक्षा है।








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