एक माह से बिजली संकट से बेहाल लोग, कारोबार से पढ़ाई और पेयजल तक व्यवस्था प्रभावित, समाधान को लेकर उठ रहे सवाल
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। प्रखंड क्षेत्र में बिजली संकट अब महज कटौती की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन का संकट बन गया है। करीब एक माह से अनियमित विद्युत आपूर्ति से उपभोक्ता परेशान हैं। ग्रामीणों के अनुसार, 24 घंटे में मुश्किल से दो-तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है। दिनभर बिजली की आंख-मिचौनी जारी रहती है और रात करीब 10 बजे के बाद कुछ राहत मिलती है। लगातार बनी इस स्थिति से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। कब बिजली आएगी और कब गुल हो जाएगी, इसका भरोसा नहीं रहता। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली संकट का कारण जानने के लिए विभाग से संपर्क करने पर भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। ऐसे में लोगों के बीच असमंजस के साथ नाराजगी भी बढ़ रही है।
जर्जर तार और बार-बार फॉल्ट ने बढ़ाई परेशानी
स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रखंड क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। 33 केवी और 11 केवी लाइनों में आए दिन फॉल्ट होने तथा तार टूटने की घटनाओं से कई इलाकों में घंटों बिजली बाधित रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत लाइनों और उपकरणों के नियमित रखरखाव तथा समय पर मरम्मत की कमी के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। लोगों का कहना है कि सिर्फ फॉल्ट होने के बाद मरम्मत करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जर्जर तारों और विद्युत उपकरणों को चिन्हित कर समय रहते बदलने तथा लाइनों का नियमित निरीक्षण जरूरी है।
डीवीसी कटौती या स्थानीय फॉल्ट, उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही स्पष्ट जानकारी
विष्णुगढ़ प्रखंड में दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के कोनार डैम पावर ग्रिड से बिजली की आपूर्ति होती है। बनासो स्थित पावर सबस्टेशन के माध्यम से क्षेत्र के विभिन्न गांवों और बाजारों तक बिजली पहुंचाई जाती है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि डीवीसी की ओर से बिजली कटौती के कारण क्षेत्र में संकट बना हुआ है। हालांकि, डीवीसी प्रबंधन अथवा स्थानीय बिजली विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में उपभोक्ताओं के बीच बिजली संकट के वास्तविक कारण को लेकर असमंजस बना हुआ है। उपभोक्ताओं की मांग है कि विभाग स्पष्ट करे कि आखिर लगातार बिजली कटौती की वजह क्या है और नियमित आपूर्ति बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
बिजली गुल तो कारोबार की रफ्तार भी थमी
लगातार बिजली गुल रहने का सीधा असर स्थानीय कारोबार पर पड़ रहा है। छोटे दुकानदारों, साइबर कैफे, ऑनलाइन सेवा केंद्रों, कुटीर उद्योगों और बिजली आधारित काम करने वाले व्यवसायियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मशीन और विद्युत उपकरण नहीं चलने से काम प्रभावित हो रहा है। ऑनलाइन काम करने वाले लोगों को वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे काम में देरी के साथ अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।
विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी संकट
बिजली संकट का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को खासकर शाम और रात के समय परेशानी उठानी पड़ रही है। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से पढ़ाई का समय प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा के समय बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त रोशनी और अनुकूल वातावरण की जरूरत होती है। ऐसे में लगातार बिजली कटौती विद्यार्थियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
बिजली गई तो पानी की टंकी भी रह गई खाली
अनियमित बिजली आपूर्ति का असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बिजली नहीं रहने के कारण मोटर नहीं चल पाती और घरों की पानी की टंकियां समय पर नहीं भर पातीं। इससे लोगों को पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त जद्दोजहद करनी पड़ रही है। गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से घरेलू जनजीवन भी प्रभावित है। पंखे और कूलर बंद रहने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की मांग
लगातार बिजली संकट को लेकर ग्रामीणों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए पूरा प्रखंड परेशान है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब एक महीने से बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है तो इस समस्या को संबंधित अधिकारियों और बिजली विभाग के समक्ष गंभीरता से कब उठाया जाएगा।
अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के वरीय अधिकारियों से क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था की समीक्षा कराने, जर्जर 33 केवी और 11 केवी लाइनों की मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार तार बदलने, बार-बार होने वाले फॉल्ट का स्थायी समाधान करने और नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि बिजली संकट का असर अब सिर्फ अंधेरे तक सीमित नहीं है। इसकी मार घरों, दुकानों, विद्यार्थियों की पढ़ाई और पेयजल व्यवस्था तक पहुंच चुकी है। ऐसे में बार-बार की अस्थायी मरम्मत के बजाय विद्युत व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की जरूरत है।









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