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विष्णुगढ़: उपरैली बोदरा-हेठली बोदरा सड़क का कब होगा कायाकल्प? चुनाव में मिला था भरोसा, आज भी जर्जर रास्तों पर चलने को मजबूर ग्रामीण

प्रत्याशियों के सामने ग्रामीण अपनी समस्याएं रखते हैं, सड़क की बदहाली दिखाई जाती है और समाधान का भरोसा भी मिलता है। लेकिन चुनाव बीतते ही वही सड़कें फिर इंतजार में रह जाती हैं...
Published: Sep 20, 2026 3:34 AM  •  Updated: Sep 20, 2026 3:57 AM
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दो साल से सड़क का इंतजार, सांसद-विधायक से ग्रामीणों का सवाल

विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। चुनाव आते हैं तो सड़क गांव की सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। प्रत्याशियों के सामने ग्रामीण अपनी समस्याएं रखते हैं, सड़क की बदहाली दिखाई जाती है और समाधान का भरोसा भी मिलता है। लेकिन चुनाव बीतते ही वही सड़कें फिर इंतजार में रह जाती हैं। अलपीटो पंचायत के हेठली बोदरा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो वर्षों से सड़क की समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच अब यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर उपरैली बोदरा-हेठली बोदरा की जर्जर सड़क का कायाकल्प कब होगा?

विष्णुगढ़: उपरैली बोदरा-हेठली बोदरा सड़क का कब होगा कायाकल्प? चुनाव में मिला था भरोसा, आज भी जर्जर रास्तों पर चलने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान मनीष जायसवाल और तिवारी महतो जब क्षेत्र में वोट मांगने पहुंचे थे, तब हेठली बोदरा को उपरैली बोदरा से जोड़ने वाली पक्की सड़क और हेठली बोदरा-चौथा नहर इंस्पेक्शन रोड की बदहाल स्थिति उनके समक्ष रखी गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय सड़क की समस्या दूर कराने का भरोसा मिला था। चुनाव भी हुए और जनप्रतिनिधि भी चुने गए, लेकिन सड़क की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

आवेदन भी दिया, फिर भी नहीं शुरू हुई मरम्मत

चुनाव के बाद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं होने पर ग्रामीण सह अधिवक्ता शैलेंद्र पाठक ने सांसद मनीष जायसवाल से मिलकर हेठली बोदरा-उपरैली बोदरा पक्की सड़क की मरम्मत कराने की मांग को लेकर आवेदन दिया। ग्रामीणों के अनुसार आवेदन दिए काफी समय बीत गया, लेकिन अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है।

विष्णुगढ़: उपरैली बोदरा-हेठली बोदरा सड़क का कब होगा कायाकल्प? चुनाव में मिला था भरोसा, आज भी जर्जर रास्तों पर चलने को मजबूर ग्रामीण

दो किलोमीटर सड़क पर जगह-जगह उखड़ा अलकतरा

हेठली बोदरा से उपरैली बोदरा तक करीब दो किलोमीटर लंबी पक्की सड़क की स्थिति कई जगह बेहद खराब हो चुकी है। सड़क की ऊपरी परत उखड़ जाने से अलकतरा गायब हो गया है और जगह-जगह गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। कई स्थानों पर सड़क में गड्ढे भी बन गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार वाहनों को इस रास्ते पर हिचकोले खाते हुए गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी परेशानी वाली हो जाती है।

कच्ची नहर सड़क बारिश में बन जाती है कीचड़ का दलदल

हेठली बोदरा से चौथा स्थित एनएच-522 तक जाने वाली नहर इंस्पेक्शन सड़क की स्थिति इससे भी खराब बताई जा रही है। कच्ची सड़क होने के कारण बारिश होते ही पूरा रास्ता कीचड़ और फिसलन में तब्दील हो जाता है। पैदल राहगीरों के साथ बाइक और अन्य वाहनों के चालकों को भी आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग चौथा और एनएच-522 तक पहुंचने का महत्वपूर्ण संपर्क रास्ता है। सड़क खराब होने का असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजमर्रा के काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। बरसात में रास्ते की स्थिति खराब होने पर लोगों की मुश्किल और बढ़ जाती है।

3,500 मतदाता, फिर भी सड़क का सवाल बरकरार

ग्रामीणों के मुताबिक अलपीटो पंचायत में करीब 3,500 मतदाता हैं। इनमें लगभग 1,700 मतदाता मांडू विधानसभा और हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के चुनाव में मतदान करते हैं, जबकि शेष मतदाता चौथा-अलपीटो क्षेत्र से बगोदर विधानसभा और कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

अलग-अलग विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में पंचायत के मतदाताओं के बंटे होने को लेकर कुछ ग्रामीणों के मन में यह सवाल भी उठता है कि क्या कम मतदाता संख्या वाले इलाके की समस्याओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है। हालांकि यह ग्रामीणों की आशंका है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों का सवाल:- सड़क कब बनेगी?

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किसी राजनीतिक दल या चुनावी घोषणा की मांग भर नहीं है। यह गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है। सड़क खराब होने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज, किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने और आम लोगों के आवागमन पर सीधा असर पड़ता है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब चुनाव के समय उनकी सड़क की बदहाली दिखाई देती है और समस्या के समाधान का भरोसा भी दिया जाता है, तो चुनाव के बाद उसी सड़क पर कार्रवाई क्यों नजर नहीं आती?

ग्रामीणों ने सांसद, विधायक और संबंधित विभाग से दोनों सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कर जल्द आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि चौथा और उपरैली बोदरा की ओर से एनएच-522 की पक्की सड़क से जुड़ने वाले इन दोनों संपर्क मार्गों की बदहाली दूर होने से हेठली बोदरा सहित आसपास के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी।

सड़क को गांव और समाज के विकास का पहिया माना जाता है। लेकिन जिस रास्ते से विकास को गांव तक पहुंचना है, वही रास्ता अगर वर्षों से बदहाल हो तो ग्रामीणों की परेशानी समझी जा सकती है। अब देखना यह है कि दो साल से सड़क के कायाकल्प की बाट जोह रहे हेठली बोदरा के ग्रामीणों की आवाज कब धरातल पर दिखाई देने वाले काम में बदलती है।

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