विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। परिवार की रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य की खातिर वर्षों से घर से दूर मुंबई में मेहनत कर रहे विष्णुगढ़ प्रखंड के बरांय पंचायत अंतर्गत नौआडीह निवासी गुलीचंद पासवान (56) की अचानक मौत हो गई। सोमवार को मुंबई में हुई उनकी मौत की खबर से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन दिन बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे बरांय पंचायत में मातम छा गया। परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल बेहद गमगीन हो गया।
स्वर्गीय बंधु पासवान के पुत्र गुलीचंद पासवान लंबे समय से मुंबई में रहकर टैक्सी चलाते थे। इसी काम से होने वाली आमदनी से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। बताया गया कि सोमवार की सुबह वह रोज की तरह अपनी टैक्सी लेकर काम के लिए निकले थे। कुछ दूरी पर वह शौचालय गए। काफी देर तक उनके बाहर नहीं निकलने पर आसपास के लोगों ने खोजबीन शुरू की। बाद में उन्हें शौचालय के अंदर मृत अवस्था में पाया गया।
घटना की सूचना मिलते ही मुंबई में रहने वाले झारखंड के प्रवासी मजदूरों एवं उनके परिचितों ने परिवार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के केईएम अस्पताल ले जाया गया, जहां आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद प्रवासी बंधुओं और गांव के लोगों के सहयोग से पार्थिव शरीर को बरांय लाया गया।
परिवार के कमाऊ सदस्य के जाने से गहरा संकट
गुलीचंद पासवान अपने पीछे पत्नी सरिता देवी, चार बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने वाले प्रमुख कमाऊ सदस्य के अचानक चले जाने से परिजनों के सामने भावनात्मक और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पति और पिता को खोने के सदमे से पत्नी एवं बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बुधवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे। लोगों ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और इस कठिन घड़ी में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने कहा कि गुलीचंद पासवान परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वर्षों से परदेस में मेहनत कर रहे थे। उनका इस तरह अचानक चले जाना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।
शेख तैयब ने जताया दुख, रोजगार के लिए पलायन रोकने की मांग
विष्णुगढ़ मध्य जिला परिषद सदस्य शेख तैयब ने गुलीचंद पासवान के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों की असमय मौत बेहद पीड़ादायक है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण झारखंड के हजारों मजदूर आज भी परिवार की आजीविका चलाने के लिए दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। सरकार को स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित करने के लिए ठोस और प्रभावी नीति बनानी चाहिए, ताकि मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए अपने परिवार से दूर महानगरों की ओर पलायन करने की मजबूरी न रहे।
ग्रामीणों ने परिवार को हरसंभव मदद का दिया भरोसा
शोक व्यक्त करने वालों में पंचायत के मुखिया राजेंद्र मंडल, भाकपा माले प्रखंड सचिव घनश्याम पाठक, जानकी शर्मा, रामेश्वर दास, मनोज मंडल, किशुन साव, जयचंद दास समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
ग्रामीणों ने कहा कि स्वर्गीय गुलीचंद पासवान के परिवार को प्रवासी मजदूरों से संबंधित प्रावधानों के तहत मिलने वाले सरकारी एवं कल्याणकारी लाभ दिलाने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
गुलीचंद पासवान की मौत ने एक बार फिर रोजगार के लिए घर से दूर रहने वाले प्रवासी मजदूरों की जिंदगी की अनिश्चितता और उनके पीछे छूट जाने वाले परिवारों की पीड़ा को सामने ला दिया है। बुधवार को गांव पहुंचा उनका पार्थिव शरीर बरांय के लिए सिर्फ एक शव नहीं, बल्कि परिवार की वर्षों की उम्मीदों और संघर्ष की दर्दनाक कहानी बन गया।
