मजदूरों का दावा-468 रुपये की निर्धारित दर के बावजूद मिल रही कम मजदूरी, काम नहीं करने वालों के खातों से नकद निकासी कर भुगतान करने का भी आरोप
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल के बगोदर वन प्रक्षेत्र अंतर्गत नवादा स्थायी पौधशाला में मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पौधशाला में काम करने वाले मजदूरों का आरोप है कि उनसे नियमित रूप से काम लिया जाता है, लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, मजदूरों ने काम नहीं करने वाले लोगों के बैंक खातों में मजदूरी की राशि भेजकर बाद में नकद निकासी किए जाने का भी आरोप लगाया है।
मजदूरों के अनुसार, वर्तमान में निर्धारित दैनिक मजदूरी 468 रुपये है। पहले बैंक खातों में 433 रुपये की दर से भुगतान किया जाता था, लेकिन अब उन्हें निर्धारित दर से कम राशि नकद दी जा रही है। मजदूरों का दावा है कि पौधशाला में काम नहीं करने वाले कुछ लोगों के खातों में मजदूरी की राशि भेजी जाती है। बाद में उन खातों से पैसे निकालकर वास्तविक मजदूरों को नकद भुगतान किया जाता है। इससे भुगतान की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मजदूरों का कहना है कि वे भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच पौधशाला में मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें अपनी मेहनत के अनुरूप मजदूरी नहीं मिल रही है। यदि उनके आरोप सही हैं तो यह न केवल मजदूरों के अधिकारों का हनन है, बल्कि सरकारी राशि के भुगतान की प्रक्रिया में भी गंभीर गड़बड़ी का मामला है।

अधिकारी ने कहा- नियम के अनुसार हो रहा भुगतान
मामले में फॉरेस्टर संजीत दास ने कहा कि सभी स्थायी मजदूरों को सरकारी नियमों के अनुसार मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। अस्थायी मजदूरों की मजदूरी और उनके भुगतान की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही।
हालांकि, अधिकारी के इस बयान के बाद भी मजदूरों के आरोपों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। यदि भुगतान नियमानुसार हो रहा है तो मजदूरों को निर्धारित दर से कम राशि मिलने की शिकायत क्यों है? पौधशाला में काम नहीं करने वाले लोगों के खातों में मजदूरी भेजे जाने के आरोपों की सच्चाई क्या है? भुगतान बैंक के बजाय नकद क्यों किया जा रहा है?
मजदूरों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मजदूरी भुगतान से जुड़े अभिलेखों, उपस्थिति पंजी, मस्टर रोल और बैंक लेनदेन की जांच करने तथा बकाया मजदूरी का पूरा भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है।







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