कंपनी बंद और वीजा खत्म होने से छा गया था खाने-रहने का संकट, जेएलकेएम उपाध्यक्ष ने भारतीय दूतावास और राज्य सरकार से साधा संपर्क
जल्द घर लौटने की जगी उम्मीद
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। सऊदी अरब में कंपनी बंद होने और वीजा की अवधि समाप्त होने के कारण संकट में फंसे विष्णुगढ़ के तीन प्रवासी मजदूरों की वतन वापसी की उम्मीद जगी है। रोजगार की तलाश में विदेश गए इन मजदूरों के सामने अब खाने-पीने और रहने तक का संकट खड़ा हो गया है। परिजनों की गुहार पर जेएलकेएम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंजीनियर मुकेश कुमार महतो ने पहल करते हुए उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रखंड के अलखरी खुर्द निवासी धनेश्वर महतो तथा अचलजामू निवासी शहदेव रजवार और रूपलाल महतो सऊदी अरब की सीटीपी (कमर्शियल टेक्नोलॉजीज प्लस) कंपनी में कार्यरत थे। इसी बीच कंपनी बंद हो गई और तीनों मजदूरों के वीजा की अवधि भी समाप्त हो गई। रोजगार और ठिकाना छिन जाने के बाद वे वहां कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मजदूरों के परिजनों ने जब अपनी पीड़ा इंजीनियर मुकेश कुमार महतो तक पहुंचाई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड गृह मंत्रालय, झारखंड सरकार के प्रवासी मजदूर नियंत्रण कक्ष और भारत सरकार के भारतीय दूतावास से संपर्क साधा। इसके बाद प्रवासी मजदूर नियंत्रण कक्ष और भारतीय दूतावास की ओर से कंपनी से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर तीनों मजदूरों की जल्द सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।

इंजीनियर मुकेश कुमार महतो ने कहा कि आखिर कब तक विष्णुगढ़ के मजदूर मामूली मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों में पलायन करते रहेंगे? कम वेतन, जोखिम भरे काम, बेहतर चिकित्सा सुविधा का अभाव और रहने-खाने की परेशानी प्रवासी मजदूरों की जिंदगी को लगातार कठिन बना रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान झारखंड में ही रोजगार के अवसर पैदा करना है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर कुशल बनाया जाए तथा क्षेत्र में छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किए जाएं तो पलायन पर काफी हद तक रोक लग सकती है। झारखंड में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, जरूरत केवल मजबूत इच्छाशक्ति, कुशल नेतृत्व और ठोस पहल की है।
अंत में उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा, जब भी हमारे क्षेत्र के लोग किसी भी संकट में होंगे, विष्णुगढ़ का बेटा चट्टान बनकर उनकी मदद के लिए हमेशा खड़ा रहेगा।







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