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JPSC भर्ती घोटाले में CID की चार्जशीट से बड़े खुलासे, PA के खातों में 1.05 करोड़ का लेन-देन; रातू के घर में लिखवाई गईं अभ्यर्थियों की कॉपियां

JPSC घोटाले में CID की चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA बृज कुमार राम को मुख्य सरगना बताया गया है। चार्जशीट के अनुसार, 5 लाख में DySP पद के लिए 80 नंबर दिए गए और 20-20 लाख में परीक्षा केंद्र के बाहर कॉपियां लिखवाई गईं। PA के खातों में 1.05 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन भी मिला है...
Published: Nov 5, 2026 7:31 PM  •  Updated: Nov 5, 2026 7:44 PM
HIGHLIGHTS
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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और अन्य चयन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID की चार्जशीट में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच में प्रश्नपत्र लीक, साक्षात्कार में कथित पैरवी, पैसे लेकर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने और परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से जुड़े आरोपों का जिक्र किया गया है। चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे मामले में JPSC की तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक (PA) बृज कुमार राम और उसके सहयोगियों की भूमिका जांच के दायरे में आई है।

तत्कालीन सदस्य के PA पर गंभीर आरोप

CID की जांच के मुताबिक, बृज कुमार राम 1 दिसंबर 2012 से JPSC में निजी सहायक के पद पर कार्यरत था। 2 सितंबर 2021 के आदेश के बाद उसे तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य के साथ संबद्ध किया गया था। आयोग के अंदरूनी कामकाज और साक्षात्कार बोर्ड तक पहुंच होने के कारण उस पर अपने पद का दुरुपयोग कर अभ्यर्थियों की पैरवी कराने का आरोप है।

चार्जशीट में दावा किया गया है कि बृज कुमार राम ने अरुण कुमार, आदित्य पांडेय, सानंद प्रकाश, धर्मेंद्र कुमार, कोचिंग शिक्षक रविशंकर कुमार और संजीत कुमार समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क बनाया था। जांच में यह भी सामने आया कि कई अभ्यर्थियों की सेटिंग तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य के माध्यम से कराई गई थी।

साक्षात्कार में अंक बढ़वाने के बदले पांच लाख लेने का आरोप

जांच में सामने आए एक मामले के अनुसार, आदित्य पांडेय के माध्यम से मनीष कुमार को साक्षात्कार में सफल कराने के लिए बृज कुमार राम से संपर्क किया गया था। आरोप है कि अंदरूनी पैरवी के जरिए मनीष कुमार को साक्षात्कार में 80 अंक दिलवाए गए, जिसके बाद उसका चयन पुलिस उपाधीक्षक (DySP) पद पर हुआ। इसके बदले बृज कुमार राम को पांच लाख रुपये मिलने का आरोप है।

इसके अलावा आदित्य पांडेय ने चार अभ्यर्थियों के रोल नंबर बृज कुमार राम को उपलब्ध कराए थे। चार्जशीट के अनुसार, इन अभ्यर्थियों के लिए प्रति उम्मीदवार 20 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था। ये सभी अभ्यर्थी तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते के साक्षात्कार बोर्ड में शामिल हुए और सफल घोषित हुए। इनमें प्रमोद कुमार पाठक का नाम भी शामिल है। जांच के दौरान उसके रांची स्थित होटल रेडिसन ब्लू में ठहरने से संबंधित प्रमाण मिलने की बात कही गई है।

रातू के मकान में छह अभ्यर्थियों की कॉपियां लिखवाने का आरोप

चार्जशीट में परीक्षा केंद्र से बाहर कॉपियां लिखवाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। जांच के अनुसार, कोचिंग शिक्षक रविशंकर कुमार के साथ धर्मेंद्र कुमार ने प्रति अभ्यर्थी 20 लाख रुपये में कथित सौदा तय किया था।

वहीं, शिवांगन की पाठशाला के निदेशक संजीत कुमार पर आरोप है कि उसने FRO मुख्य परीक्षा के छह अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं परीक्षा केंद्र से बाहर रातू स्थित एक मकान में अलग से लिखवाने की व्यवस्था की। जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित तरीके से अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराया गया।

JET-2024 परीक्षा में OMR कार्बन कॉपी का मामला

जांच में अरुण कुमार और बृज कुमार राम के पुराने संबंधों का भी जिक्र किया गया है। चार्जशीट के अनुसार, बिनसिस कंपनी को पहले JSSC की जूनियर इंजीनियर परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के मामले के बाद टर्मिनेट किया गया था। इसके बावजूद झारखंड पात्रता परीक्षा (JET-2024) का काम हासिल करने के लिए कथित तौर पर दोबारा सौदेबाजी की गई।

आरोप है कि धर्मेंद्र कुमार की शर्तों पर हुए इस सौदे के तहत छह अभ्यर्थियों को पांच-पांच लाख रुपये में OMR की कार्बन प्रति उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें मेरिट सूची में स्थान दिलाने में मदद मिली।

PA के तीन बैंक खातों में 1.05 करोड़ रुपये का लेन-देन

CID की जांच में बृज कुमार राम के बैंक खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। चार्जशीट के मुताबिक, उसके SBI, Axis Bank और IDBI Bank के तीन सक्रिय खातों में 1 जनवरी 2024 से 2 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 1,771 लेन-देन दर्ज किए गए।

इन खातों में लगभग 1.05 करोड़ रुपये का क्रेडिट और डेबिट ट्रांजेक्शन हुआ। वहीं, इसी अवधि में झारखंड ई-पे के माध्यम से उसका आधिकारिक वेतन लगभग 31.33 लाख रुपये बताया गया है। जांच एजेंसी ने परीक्षा आयोजित होने की अवधि के दौरान खातों में आई अन्य बड़ी रकम को भी जांच का हिस्सा बनाया है।

जांच के बाद कई सवाल खड़े

CID की चार्जशीट में सामने आए इन तथ्यों ने झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप न्यायिक प्रक्रिया में साबित होते हैं, तो यह मामला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़े स्तर पर कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की तस्वीर सामने ला सकता है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों एवं सुनवाई के आधार पर होगा।

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