Giridih: 8 लाख का सुलभ शौचालय बना शोपीस, उद्घाटन से पहले ही जर्जर, तिसरी में सरकारी धन के उपयोग पर उठे सवाल

बस पड़ाव के पास बना शौचालय वर्षों से बंद, पानी की व्यवस्था नहीं होने से आम लोगों को नहीं मिल पा रहा लाभ...

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तिसरी (Giridih) / मनोज लाल बर्नवाल: स्वच्छ भारत मिशन और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) भारत के दावों के बीच गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। तिसरी चौक स्थित भंडारी रोड बस पड़ाव के समीप वित्तीय वर्ष 2019-20 में जिला परिषद मद से लगभग 8 लाख रुपये की लागत से निर्मित सुलभ शौचालय आज तक आम लोगों के उपयोग के लिए शुरू नहीं हो सका है। वर्षों से बंद पड़े इस शौचालय पर ताला लटका है और रखरखाव के अभाव में भवन जर्जर होने लगा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय निर्माण के बाद न तो पानी की समुचित व्यवस्था की गई और न ही इसके संचालन की कोई पहल हुई। परिणामस्वरूप भवन के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं, दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं और सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है।

यह शौचालय बस पड़ाव और बाजार के समीप स्थित होने के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय दुकानदारों के लिए उपयोगी साबित हो सकता था। लेकिन इसके बंद रहने से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

इस संबंध में पंचायत की मुखिया किशोरी साव ने बताया कि जिला परिषद की ओर से अब तक शौचालय पंचायत को हैंडओवर नहीं किया गया है। साथ ही पंचायत के पास इसके संचालन और रखरखाव के लिए कोई अलग फंड उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे चालू कराना संभव नहीं हो पा रहा है।

वहीं तिसरी दक्षिणी भाग के जिला परिषद सदस्य रामकुमार रावत ने कहा कि निर्माण के दौरान बोरिंग कराई गई थी, लेकिन उसमें पानी नहीं निकला। इसके बाद तकनीकी कारणों से वैकल्पिक जल व्यवस्था नहीं हो सकी, जिससे योजना अधूरी रह गई।

इधर तिसरी प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष मो. मुनिबुद्दीन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि स्थल पर पानी की व्यवस्था ही नहीं थी, तो योजना का प्राक्कलन कैसे स्वीकृत हुआ और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना कार्य पूर्ण मानकर भुगतान किस आधार पर कर दिया गया। उन्होंने दोषियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस शौचालय को जल्द चालू नहीं किया गया, तो लाखों रुपये की लागत से बनी यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बेकार हो जाएगी। अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि आखिर इस मामले में जिम्मेदारी कब तय होगी और जनता को इस सुविधा का लाभ कब मिलेगा।

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