अपने लैपटॉप, ऑपरेटर और जेब के पैसे से पूरा कराया काम, अब बकाया राशि के भुगतान की मांग
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रज्ञा केंद्र संचालक (वीएलई) इन दिनों अपने ही बकाया भुगतान को लेकर परेशान हैं। सरकारी निर्देश पर समय-समय पर दिन-रात काम करने वाले वीएलई का कहना है कि कई कार्यों में उन्होंने अपने संसाधनों और निजी राशि का इस्तेमाल किया, लेकिन संबंधित कार्यों की बकाया राशि अब तक नहीं मिल सकी है। भुगतान के लिए कई बार प्रखंड और अंचल कार्यालय में लिखित आवेदन भी दिया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
वीएलई संचालकों का कहना है कि प्रज्ञा केंद्र चलाने के लिए उन्हें अपना लैपटॉप, इंटरनेट कनेक्शन, ऑपरेटर और अन्य संसाधन खुद उपलब्ध कराने पड़ते हैं। जब सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त या समयबद्ध कार्य सौंपा जाता है तो उसे निर्धारित समय में पूरा करने के लिए अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। कई संचालकों के हजारों रुपये ऐसे सरकारी कार्यों में फंसे हुए हैं। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
मुश्किल समय में सरकार के साथ खड़े रहे वीएलई
संचालकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण का दौर हो या आधार से संबंधित कार्य, हर चुनौतीपूर्ण समय में प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने सरकारी व्यवस्था का साथ दिया। कोरोना काल में जब पर्याप्त सरकारी ऑपरेटर उपलब्ध नहीं थे, तब वीएलई ने गांव-गांव जाकर डाटा एंट्री समेत अन्य जरूरी कार्यों में सहयोग किया। कोविड टीकाकरण से संबंधित कार्यों में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।
आधार बनाने और उससे जुड़े कार्यों के दौरान भी प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने लंबे समय तक काम किया। चुनाव के दौरान लाइव टेलीकास्ट सहित तकनीकी जिम्मेदारियां निभाने से लेकर जनधन योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने तक में वीएलई की भूमिका रही है।
काम तत्काल, भुगतान का इंतजार सालों तक
वीएलई संचालकों का कहना है कि सरकारी कार्यों में जरूरत पड़ने पर उनसे कम समय में अधिक काम पूरा करने की अपेक्षा की जाती है। वे उपलब्ध संसाधनों के साथ काम पूरा भी करते हैं, लेकिन भुगतान के मामले में लंबा इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना है कि काम कराने के समय विभागीय स्तर पर तेजी दिखाई जाती है, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया में वर्षों लग जाते हैं।
संचालकों ने कहा कि यदि इसी तरह बकाया राशि लंबित रही तो आने वाले समय में अपने खर्च पर सरकारी कार्य करना उनके लिए मुश्किल हो जाएगा। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाने वाली सरकारी सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

बकाया भुगतान नहीं हुआ तो बढ़ेगी परेशानी
प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने प्रखंड एवं अंचल प्रशासन से पूर्व में कराए गए कार्यों का सत्यापन कर लंबित राशि का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वीएलई सरकारी व्यवस्था और ग्रामीण जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। सरकारी कार्यों में अपने संसाधन और समय लगाने वाले संचालकों को यदि समय पर भुगतान नहीं मिला तो उनके लिए आगे भी उसी तत्परता से सेवाएं देना चुनौतीपूर्ण होगा।
संचालकों ने प्रशासन से मांग की है कि लंबित भुगतानों की सूची तैयार कर सभी संबंधित वीएलई को बकाया राशि का भुगतान जल्द कराया जाए, ताकि प्रज्ञा केंद्रों के माध्यम से सरकारी सेवाओं का संचालन सुचारु रूप से जारी रह सके।
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