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हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महीनों से एंटी सीरम अनुपलब्ध, सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर डीसी और स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट कर की गई शिकायत

Published: Jun 23, 2026 3:22 AM  •  Updated: Jun 23, 2026 3:22 AM
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गरीब मरीजों पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ, बाहर से ये दवा खरीदने को मजबूर हो रहे हैं जरूरतमंद

सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर उठाए सवाल, तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग

हजारीबाग। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग में पिछले कई महीनों से एंटी-रेबीज सीरम रेबीज़ इम्युनोग्लोबुलिन उपलब्ध नहीं है। इसके कारण अस्पताल पहुंचने वाले जरूरतमंद और गरीब मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुत्ते या अन्य जानवरों के काटने के बाद गंभीर स्थिति में दिए जाने वाले इस जीवन रक्षक सीरम को मरीजों को मजबूरी में बाहर की दुकानों से मनमाने दामों पर खरीदना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल के दिशा- निर्देश पर उनके हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने जिले के उपायुक्त हेमंत सती और सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को ट्वीट के जरिए मामले की जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट कर इस समस्या पर तत्काल संज्ञान लेने और हजारीबाग के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एंटी सीरम की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का म आग्रह किया है।

सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने बताया कि हजारीबाग और आसपास के इलाकों से कमोबेश हर दो दिन दिन में ऐसे जरूरतमंद एनिमल बाइट के मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, जिनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सक उन्हें एंटी सीरम प्रिस्क्राइब करते हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में यह सीरम उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इसे बाहर से खरीदना पड़ता है, जो बेहद निराशाजनक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन को जनहित के ऐसे गंभीर मुद्दों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। यही वजह है कि पिछले कई महीनों से एंटी सीरम जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण दवा की अनुपलब्धता होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसकी उपलब्धता को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं किया गया। रंजन चौधरी ने मांग किया कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करे ताकि गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल सके।

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