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NEET पेपर लीक : 23 लाख सपनों पर एक लीक का प्रहार – आलोक सोनी

Published: May 15, 2026 2:37 AM  •  Updated: May 15, 2026 2:37 AM
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चौपारण (हजारीबाग)। प्रखंड के ग्राम बसरिया निवासी युवा समाजसेवी आलोक सोनी ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बताया है। उन्होंने कहा कि देश में हर मंच से युवाओं को भारत का भविष्य बताया जाता है। प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री तक शिक्षा, डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे करते हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आज भारत का छात्र किताबों से ज्यादा पेपर लीक, धांधली और भ्रष्ट सिस्टम का अध्याय पढ़ने को मजबूर है। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला केवल एक परीक्षा का घोटाला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल है जो हर साल युवाओं के सपनों पर भाषण तो देती है, लेकिन उनकी मेहनत की सुरक्षा नहीं कर पाती। लगभग 23 लाख छात्रों ने डॉक्टर बनने के लिए परीक्षा दी। किसी पिता ने खेत गिरवी रखा, किसी माँ ने गहने बेचे, बच्चों ने वर्षों तक नींद और बचपन छोड़ा। लेकिन परीक्षा के बाद पता चला कि प्रश्नपत्र पहले ही बाजार में बिक चुका था। जांच में सामने आया कि “गेस पेपर” के नाम पर लाखों रुपये लेकर असली प्रश्न बेचे जा रहे थे। कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच अब CBI कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि हर बार घोटाले के बाद ही सरकार क्यों जागती है? जब परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर पेपर घूम रहा था, तब सिस्टम कहाँ था? क्या देश की पूरी तकनीक केवल चुनाव प्रचार और भाषणों के लिए बची है? सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पहली घटना नहीं है। NEET, UGC-NET, SSC, रेलवे, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, शायद ही कोई बड़ी परीक्षा बची हो जिस पर पेपर लीक या धांधली का आरोप न लगा हो। ऐसा लगने लगा है कि देश में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र नहीं, बल्कि ईमानदार छात्रों का भविष्य लीक हो जाता है। सरकार हर बार सख्त कार्रवाई का बयान देती है, कुछ गिरफ्तारियां होती हैं, फिर अगली परीक्षा में वही कहानी दोहराई जाती है। इस भ्रष्ट व्यवस्था का सबसे बड़ा शिकार युवा हो रहे हैं। कोटा सहित कई जगहों से छात्रों की आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं। बच्चे मानसिक तनाव, अवसाद और असफलता के डर में टूट रहे हैं। उन्हें लगने लगा है कि मेहनत नहीं, बल्कि पैसे और पहुंच वालों का सिस्टम चलता है। यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। सबसे ज्यादा दर्द उन लड़कियों का है जिन्हें घर से पढ़ाई के लिए सीमित समय मिलता है। कई परिवार एक-दो साल की तैयारी के बाद विवाह का दबाव बनाने लगते हैं। जब परीक्षा ही निष्पक्ष न रहे, तो हजारों बेटियों के डॉक्टर बनने के सपने बीच रास्ते में दम तोड़ देते हैं। एक पेपर लीक केवल रिजल्ट खराब नहीं करता, बल्कि कई लड़कियों का पूरा जीवन बदल देता है। सरकार विश्वगुरु भारत का सपना दिखाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि देश का युवा आज अपनी ही शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा खोता जा रहा है। चंद्रयान चाँद तक पहुँच सकता है, डिजिटल पेमेंट दुनिया को चौंका सकता है, लेकिन करोड़ों छात्रों की परीक्षा सुरक्षित नहीं हो पा रही। यह केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक असफलता भी है। यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था को ईमानदार और पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो आने वाली पीढ़ी मेहनत पर नहीं, जुगाड़ पर विश्वास करना सीख जाएगी। और जिस देश के युवा मेहनत से भरोसा खो दें, उस देश का भविष्य केवल भाषणों से नहीं बचाया जा सकता।

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Nitish Keshri

नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।

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