रांची: झारखंड के संथाल परगना में आदिवासी आबादी और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की योजना में छात्र नेताओं और युवाओं को शामिल कर लोगों के बीच पहुंचने पर जोर दिया जा रहा है।
पूर्व मंत्री एवं सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह ने कहा कि भाजपा आदिवासी आबादी में कथित गिरावट के मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएगी। उन्होंने बताया कि अभियान की रूपरेखा गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे के नेतृत्व में तैयार की जाएगी। इस संबंध में छात्र नेताओं के साथ बातचीत भी की जा रही है।
छात्र और युवाओं को जोड़ने की रणनीति

रणधीर सिंह के अनुसार, संथाल परगना की सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर पार्टी गंभीर है। भाजपा उन क्षेत्रों में लोगों के बीच जाने की तैयारी कर रही है, जहां आदिवासी आबादी में कमी आने के दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश से आए लोगों की संख्या बढ़ने से क्षेत्र की आबादी का संतुलन प्रभावित हो रहा है। हालांकि, अपने बयान में उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया।
गौरतलब है कि सांसद निशिकांत दुबे हाल में संथाल परगना के छात्र नेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा कर चुके हैं। ऐसे में भाजपा की इस पहल को क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने और युवाओं को अभियान से जोड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना
रणधीर सिंह ने मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली में एसआईआर के विरोध को राजनीतिक कदम बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रहा है।
भाजपा नेता ने कहा कि मतदाता सूची की जांच और मतदाताओं की पहचान की प्रक्रिया पहले भी होती रही है। इसके बावजूद विपक्ष इस प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा है। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच रणधीर सिंह ने भाजपा के रुख का समर्थन किया।
संथाल परगना में तेज हो सकती है सियासी हलचल
संथाल परगना झारखंड की राजनीति का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां आदिवासी अधिकार, स्थानीय आबादी, प्रवासन और मतदाता सूची जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। भाजपा की ओर से छात्र-युवाओं को साथ लेकर अभियान चलाने की तैयारी से आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।







