ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के साथ काली तालाब पहुंचे श्रद्धालु, 9 पवित्र पौधों के प्रतीक नवपत्रिका की स्थापना के साथ मुख्य अनुष्ठान शुरू
Sahibganj News: संवाददाता ब्रह्मदेव कुमार महतो। बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र के बड़ी दुर्गा मंदिर हाटपाड़ा, बंगाली पाड़ा स्थित सार्वजनिक पहाड़ी बाबा स्मृति मातृ दुर्गा मंदिर, बंगाली पाड़ा, कुशवाहा टोला, पुरानी धर्मशाला, सब्जी मंडी, छाता डांगल, पतना चौक, रेलवे कॉलोनी, चंडीपुर ,बिंदुधाम के अलावे बरहरवा प्रखंड के विभिन्न दुर्गा मंदिर एवं दुर्गा पंडाल समितियां के तत्वावधान में शनिवार को महासप्तमी के पावन अवसर पर परंपरागत कलश यात्रा का आयोजन किया गया।मंदिर के पुजारी ने बताया कि दुर्गा पूजा के दौरान महासप्तमी के दिन ‘काला बाहु’ यानी ‘कोला बौ’ / केला बहू की पूजा जिसे नवपत्रिका पूजा (Navapatrika Puja) और काला बहू स्नान भी कहा जाता है, का विशेष महत्व है। शनिवार सुबह मंदिर प्रांगण से महिलाओं और युवतियों की टोली ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के साथ निकली। हाथों में नवपत्रिका लिए श्रद्धालु काली तालाब पहुंचे। वहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ केला के पौधे समेत 9 पवित्र पौधों से बनी नवपत्रिका को प्रतीकात्मक स्नान कराया गया, नए वस्त्र पहनाए गए और कलश में जल भरा गया।
क्या है काला बाहु?
यह कोई जीवित वधू नहीं, केले के एक छोटे पौधे (Kola Gachh) को पारंपरिक लाल-पार साड़ी में लपेटकर देवी दुर्गा के रूप में तैयार किया जाता है। केला और अन्य 8 पौधे मिलकर ‘नवपत्रिका’ बनाते हैं, जिसे प्रकृति, उर्वरता, समृद्धि और जीवन-दायिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसे मां दुर्गा के नौ रूपों का ही एक रूप मानकर पूजा जाता है, जिससे दुर्गा पूजा के मुख्य अनुष्ठानों की शुरुआत होती है। इसके बाद जल से भरे कलश और स्नान कराई गई नवपत्रिका को वापस मंदिर पंडाल में लाकर मां दुर्गा के समीप स्थापित किया गया। इस दौरान पूरे बंगाली पाड़ा क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। महिलाओं ने बताया कि तालाब से लाया गया यह पवित्र जल पूरे पूजा के दौरान उपयोग में लाया जाएगा। मौके पर मंदिर समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु मौजूद थे।
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