विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। प्रखंड के श्री महंत अखाड़ा स्थित श्री श्री बंशीधर मंदिर परिसर में रविवार को विप्र समाज विष्णुगढ़ के तत्वावधान में संस्कृत दिवस सह सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विप्र समाज के लोग शामिल हुए। धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के बीच आयोजित समारोह में संस्कृत भाषा के संरक्षण, भारतीय संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद हाल के दिनों में विप्र समाज द्वारा अपने दो सदस्यों श्रीकृष्ण जीवन मिश्रा एवं निरंजन मिश्रा को खोने पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित सदस्यों ने समाज के प्रति दोनों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके कार्यों की सराहना की और उनकी स्मृति को नमन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विप्र समाज के अध्यक्ष रोहितानंद मिश्रा ने की, जबकि संचालन समाज के सचिव यशवंत मिश्रा ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है।
संस्कृत के संरक्षण के लिए नई पीढ़ी को जोड़ना जरूरी
वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक दौर में संस्कृत भाषा का दैनिक जीवन में प्रयोग लगातार कम होता जा रहा है। संस्कृत महज एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, ज्ञान, साहित्य और परंपराओं की मजबूत आधारशिला है। इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को संस्कृत के महत्व से परिचित कराकर उनमें इसके प्रति रुचि पैदा करने की आवश्यकता है।
विप्र समाज के सचिव यशवंत मिश्रा ने कहा कि “संस्कृत है तो हमारी संस्कृति है, संस्कृत है तो हमारा संस्कार है और संस्कृत है तो भारत की सभ्यता की पहचान है।” उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समाज को सामूहिक रूप से आगे आना होगा।
विष्णुगढ़ में संस्कृत पाठशाला शुरू कराने का प्रयास
विप्र समाज के अध्यक्ष रोहितानंद मिश्रा ने कहा कि विष्णुगढ़ प्रखंड की युवा पीढ़ी को संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए आने वाले दिनों में विशेष पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों का सहयोग मिला तो विष्णुगढ़ में संस्कृत पाठशाला शुरू कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा, ताकि बच्चों और युवाओं को संस्कृत सीखने का बेहतर अवसर मिल सके।
भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल, सुंदरकांड पाठ में जुटे श्रद्धालु
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। भजनों की प्रस्तुतियों की लोगों ने खूब सराहना की। इसके बाद उमेश मिश्रा के संचालन में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। सुंदरकांड पाठ के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
कार्यक्रम के समापन पर सचिव यशवंत मिश्रा ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी विप्र बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से समाज के लोगों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समारोह में उपस्थित विप्र समाज के सदस्यों ने संकल्प लिया कि प्रत्येक वर्ष संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन और अधिक भव्य एवं व्यापक स्तर पर किया जाएगा, ताकि संस्कृत भाषा के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराओं से मजबूती से जोड़ा जा सके।
मौके पर सुनील कुमार पाण्डेय, दिनेश्वर पांडेय, घनश्याम पाठक, रोशन पांडेय, रवीन्द्र पाठक, जयकुमार पाठक, पवन कुमार मिश्रा, अमरप्रेम पांडेय, उमेश कुमार मिश्रा, प्रमोद पाण्डेय, यशवंत मिश्रा एवं धनंजय मिश्रा समेत बड़ी संख्या में विप्र समाज के लोग उपस्थित थे।
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