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चौपारण में पुरोहितों के मुद्दे पर ब्राह्मण समाज लामबंद, शंखनाद रैली निकाल जताया विरोध

Published: Oct 25, 2026 7:13 PM  •  Updated: Oct 25, 2026 7:13 PM
HIGHLIGHTS
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स्थानीय पंडितों को प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल करने की मांग, सहमति बनने तक पूजा-पाठ से दूर रहने की चेतावनी

चौपारण। दुर्गा पूजा में स्थानीय पुरोहितों की भूमिका को लेकर चौपारण में विवाद गहराता नजर आ रहा है। स्थानीय ब्राह्मणों की जगह बनारस से पंडित बुलाकर पूजा कराने के निर्णय के विरोध में रविवार को ब्राह्मण समाज के लोगों ने शंखनाद रैली निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की। चैथी गांव समेत आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने चौपारण बाजार में पैदल मार्च कर स्थानीय पुरोहितों को धार्मिक अनुष्ठानों में उचित सम्मान और भागीदारी देने की मांग उठाई।

प्रदर्शन में शामिल ब्राह्मण समाज के लोगों ने कहा कि स्थानीय पुरोहित वर्षों से दुर्गा पूजा सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी सेवाएं देते रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्रमुख पूजा-पाठ से अलग रखना उचित नहीं है। समाज के लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक दुर्गा पूजा समिति और ब्राह्मण समाज के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती, तब तक वे चौपारण में पूजा-पाठ नहीं कराएंगे।

स्थानीय पुरोहितों को अवसर देने की मांग

प्रदर्शन के दौरान नरेश पांडेय ने कहा कि चौपारण दुर्गा मंडप में वर्षों से स्थानीय पुरोहित पूजा-पाठ कराते आ रहे हैं। इस वर्ष स्थानीय पंडितों की जगह बनारस से पुरोहित बुलाकर पूजा कराने का निर्णय समाज के लोगों को अपमानित करने वाला है। उन्होंने कहा कि स्थानीय ब्राह्मणों को केवल एकादशी पूजा और भोज तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में भी उन्हें पूजा कराने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह विरोध स्थानीय पुरोहितों के सम्मान, परंपरा और धार्मिक कार्यों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। समाज के लोगों ने समिति से बातचीत कर मामले का सम्मानजनक समाधान निकालने की मांग की।

दुर्गा पूजा समिति ने रखी अपनी सफाई

वहीं, दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अभिमन्यु भगत ने इस मामले में अपनी बात रखते हुए कहा कि पांडेयबारा निवासी पुरोहित बालमुकुंद पांडेय और चैथी निवासी अवधेश पांडेय के माध्यम से वर्षों से पूजा-पाठ कराया जाता रहा है। उनकी अधिक उम्र और पूजा के दौरान होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए समिति पिछले कुछ वर्षों से वैकल्पिक व्यवस्था करने का आग्रह कर रही थी।

अध्यक्ष के अनुसार, स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं होने के बाद समिति ने सर्वसम्मति से बनारस से पंडित बुलाकर पूजा कराने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बालमुकुंद पांडेय और अवधेश पांडेय को पूर्व की तरह जीवनभर समिति की ओर से राशि देने का निर्णय लिया गया था और उनके पारिश्रमिक में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

अभिमन्यु भगत ने बताया कि षष्ठी के दिन पूजा-पाठ के लिए बैठने वाले कुछ अन्य पंडितों ने भी अचानक असमर्थता जताई थी। इसके बाद पूजा की व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनारस से चार पंडितों को बुलाना पड़ा।

बातचीत से समाधान निकालने की जरूरत

इस मामले में एक ओर स्थानीय पुरोहितों को धार्मिक अनुष्ठानों में पर्याप्त भागीदारी देने की मांग उठ रही है, तो दूसरी ओर समिति पूजा की व्यवस्था और पुरोहितों की उपलब्धता को अपने निर्णय का आधार बता रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल असर न पड़े।

शंखनाद रैली में आचार्य ओम प्रकाश पांडेय, नरेश पांडेय, अवधेश पांडेय, सतेंद्र पांडेय, रवीन्द्र पांडेय, चंद्रशेखर पांडेय, जितेंद्र पांडेय, मिथुन पांडेय, कामेश्वर पांडेय, शेखर पांडेय, प्रफुल्ल पांडेय सहित ब्राह्मण समाज के कई लोग शामिल हुए।

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