समुद्र के नीचे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और भूस्खलन से पैदा होती हैं सुनामी की विशाल लहरें, पहली लहर हमेशा सबसे बड़ी नहीं होती
चौपारण (हजारीबाग)। विश्व सुनामी जागरूकता दिवस के अवसर पर सुनामी के खतरों और इससे बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की गई। हजारीबाग जिले के बरही विधानसभा क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि एवं सुनामी जागरूकता अभियान झारखंड प्रदेश इकाई के संयोजक मुकुंद साव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सुनामी समुद्र में उत्पन्न होने वाली विशाल लहरों की एक श्रृंखला है, जो बिना किसी पूर्व चेतावनी के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचा सकती है।
मुकुंद साव ने बताया कि सुनामी की लहरें कई बार पानी की विशाल दीवारों जैसी दिखाई देती हैं। इनका खतरा पहली लहर के बाद भी समाप्त नहीं होता। सुनामी के दौरान हर 5 से 60 मिनट के अंतराल पर लगातार लहरें आ सकती हैं। विशेष बात यह है कि पहली लहर हमेशा सबसे बड़ी नहीं होती, बल्कि दूसरी, तीसरी, चौथी या उसके बाद आने वाली लहरें अधिक विनाशकारी हो सकती हैं। इसलिए पहली लहर के बाद भी सुरक्षित स्थान से वापस लौटना बेहद खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि समुद्र के नीचे या उसके आसपास आने वाले शक्तिशाली भूकंप सुनामी का प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा समुद्र के भीतर ज्वालामुखी विस्फोट, समुद्री भूस्खलन, तटीय चट्टानों का गिरना और किसी बड़े क्षुद्रग्रह का समुद्र से टकराना भी सुनामी पैदा कर सकता है।
मुकुंद साव ने चिंता जताते हुए कहा कि तटीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती आबादी और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के कारण लाखों लोग सुनामी के खतरे की चपेट में हैं। ऐसी आपदा में लोगों की जान के साथ-साथ उनकी आजीविका, घर और संपत्ति भी नष्ट हो सकती है। हालांकि, समय रहते चेतावनी के संकेतों को पहचानकर और तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंचकर बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सकता है।
उन्होंने लोगों को प्राकृतिक चेतावनी संकेतों के प्रति सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि समुद्र में तेज भूकंप महसूस होना, समुद्र के पानी का अचानक असामान्य रूप से पीछे हटना या समुद्र से तेज गर्जना जैसी आवाज सुनाई देना सुनामी के संभावित संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी चेतावनी का इंतजार किए बिना तत्काल ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाना चाहिए।
मुकुंद साव ने कहा कि झारखंड जैसे गैर-तटीय राज्य में सुनामी का सीधा खतरा कम है, लेकिन आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता हर क्षेत्र के लोगों के लिए जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि सुनामी जागरूकता अभियान झारखंड प्रदेश इकाई लोगों को इस प्राकृतिक आपदा के प्रति जागरूक करने और बचाव संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि सुनामी के खतरों को समझें, बचाव के उपाय जानें और जागरूकता का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।






