राज्य निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई, मांडू, पतरातू और गोला क्षेत्र के प्रत्याशी प्रभावित; 5 नवंबर से आदेश लागू
रामगढ़। पंचायत चुनाव लड़ने के बाद चुनावी खर्च का ब्योरा जमा नहीं करना रामगढ़ जिले के दस प्रत्याशियों को भारी पड़ गया है। झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने नियमों की अनदेखी करने वाले इन सभी प्रत्याशियों पर तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयोग की ओर से जारी यह आदेश 5 नवंबर 2026 से प्रभावी हो गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में आयोजित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन प्रत्याशियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन चुनाव संपन्न होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च का विवरण राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध नहीं कराया। पंचायत चुनाव के नियमों के तहत प्रत्येक प्रत्याशी के लिए चुनाव में किए गए खर्च का पूरा हिसाब जमा करना अनिवार्य है। इसका पालन नहीं करने पर संबंधित प्रत्याशी के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है।
नोटिस के बावजूद नहीं दे सके संतोषजनक जवाब
चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित प्रत्याशियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। आयोग की ओर से उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया, लेकिन प्रत्याशी ऐसा कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके आधार पर उन्हें राहत मिल सके।
इसके बाद रामगढ़ के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी की रिपोर्ट पर विचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी दस प्रत्याशियों के खिलाफ कार्रवाई की। आयोग ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तीन वर्षों तक पंचायत चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया है।
मांडू के चार, पतरातू के पांच और गोला के एक प्रत्याशी शामिल
आयोग की इस कार्रवाई की जद में रामगढ़ जिले के तीन प्रखंडों के प्रत्याशी आए हैं। इनमें मांडू क्षेत्र के चार, पतरातू क्षेत्र के पांच और गोला क्षेत्र के एक प्रत्याशी शामिल हैं।
प्रतिबंधित किए गए प्रत्याशियों की सूची
1. सविता देवी — रामगढ़/02/मांडू
2. सुमति देवी — रामगढ़/02/मांडू
3. मिथिलेश महतो — रामगढ़/04/मांडू
4. त्रिभुवन प्रसाद — रामगढ़/04/मांडू
5. अरविंद कुमार — रामगढ़/04/मांडू
6. खुशबू देवी — रामगढ़/06/पतरातू
7. झरी मुंडा — रामगढ़/06/पतरातू
8. रंजीत कुमार यादव — रामगढ़/06/पतरातू
9. रामफल बेदिया — रामगढ़/08/पतरातू
10. उषा देवी — रामगढ़/15/गोला
चुनावी नियमों के पालन का सख्त संदेश
राज्य निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई को पंचायत चुनाव में पारदर्शिता और नियमों के पालन से जोड़कर देखा जा रहा है। आयोग के इस फैसले से प्रत्याशियों को स्पष्ट संदेश मिला है कि चुनाव लड़ने के साथ-साथ निर्धारित नियमों और खर्च संबंधी प्रक्रियाओं का पालन करना भी अनिवार्य है। चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं देना अब प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य पर भी असर डाल सकता है।












