रांची में साइबर ठगी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़! फ्लैट में चल रहा था ठगी का कॉल सेंटर, 11 गिरफ्तार
सैलरी के साथ ठगी की रकम का 25% कमीशन देकर युवाओं से कराते थे साइबर ठगी, छात्र बनकर किराए पर लिया था फ्लैट; 7.98 लाख रुपये नकद, 36 मोबाइल और 32 एटीएम कार्ड बरामद
आदित्य ओहदार | क्राइम डेस्क
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जामताड़ा मॉड्यूल की तर्ज पर संचालित हो रहे साइबर ठगी के सिंडिकेट पर रांची पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नाबालिग समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग किराए के फ्लैट में कॉल सेंटर जैसा सेटअप तैयार कर आम लोगों को फोन के जरिए साइबर ठगी का शिकार बनाते थे। इस पूरे नेटवर्क का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि गिरोह में काम करने वाले कुछ लोगों को मासिक वेतन के साथ ठगी की कुल रकम का 25 प्रतिशत कमीशन भी दिया जाता था।
पुलिस की कार्रवाई के बाद साइबर अपराधियों के काम करने के तरीके, उनके नेटवर्क और आम लोगों की निजी जानकारी तक पहुंच बनाने के कथित तौर-तरीकों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इसके तार किन-किन लोगों से जुड़े हुए हैं।
दो जगह छापेमारी, 11 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन को मंगलवार को गुप्त सूचना मिली थी कि रातू रोड इलाके में साइबर अपराधियों का एक गिरोह सक्रिय है। सूचना के आधार पर कोतवाली एएसपी निखिल राय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रातू रोड स्थित मालती अपार्टमेंट के एक फ्लैट में छापेमारी की। यहां से कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पिस्का मोड़ के दो स्थानों पर भी छापेमारी की गई। पुलिस ने इन ठिकानों से मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किए। पुलिस के मुताबिक, गिरोह रांची के दो अपार्टमेंट के फ्लैटों से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था।
ठगी के बदले सैलरी और 25 प्रतिशत कमीशन
पूछताछ में पुलिस को गिरोह के कथित आर्थिक मॉडल के बारे में अहम जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड आरोपियों को ठगी की रकम का 25 प्रतिशत कमीशन देता था। कुछ लोगों को इसके अतिरिक्त मासिक वेतन भी दिया जाता था।
इतना ही नहीं, गिरोह में शामिल लोगों के रहने और खाने-पीने का खर्च भी कथित तौर पर मास्टरमाइंड ही उठाता था। इस तरह युवाओं को आर्थिक लाभ का लालच देकर साइबर ठगी के नेटवर्क में शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस अब कथित मास्टरमाइंड की भूमिका, गिरोह के वित्तीय लेन-देन और ठगी से प्राप्त रकम के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
छात्र बनकर किराए पर लिया फ्लैट, अंदर तैयार किया ठगी का सेटअप
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मकान मालिकों के सामने खुद को छात्र बताया और इस बहाने फ्लैट किराए पर लिया। इसके बाद फ्लैट के अंदर ही साइबर ठगी के लिए जरूरी उपकरणों और अन्य संसाधनों का इंतजाम कर लिया।
बाहर से सामान्य आवासीय फ्लैट दिखाई देने वाली इन जगहों से कथित तौर पर लोगों को फोन कर ठगी की जाती थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपने काम को अंजाम देने के लिए पूरा सेटअप तैयार कर रखा था।
इस खुलासे ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि आवासीय परिसरों में किराए पर रहकर साइबर अपराध को अंजाम देने वाले गिरोहों की गतिविधियों पर निगरानी रखना कितना जरूरी है।
कुरियर कंपनियों के कर्मचारियों से डेटा खरीदने का आरोप
पुलिस की जांच में लोगों की निजी जानकारी हासिल करने के कथित नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड कुरियर और अन्य कंपनियों के कुछ कर्मचारियों के संपर्क में था। आरोप है कि इन कर्मचारियों के माध्यम से आम लोगों के मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियां हासिल की जाती थीं।
बताया गया कि इस डेटा के बदले संबंधित कर्मचारियों को पैसे दिए जाते थे। इसके बाद प्राप्त जानकारी साइबर ठगी में शामिल आरोपियों तक पहुंचाई जाती थी। आरोपी कथित तौर पर इन्हीं मोबाइल नंबरों पर फोन कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की निजी जानकारी के कथित अवैध कारोबार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्रवाई हो सकती है।
7.98 लाख रुपये नकद समेत भारी मात्रा में सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से बड़ी संख्या में नकदी, मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद सामान में शामिल हैं—
- नकद राशि: 7 लाख 98 हजार रुपये
- मोबाइल फोन: 36
- लैपटॉप: 1
- विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड: 32
- बैंक पासबुक: 5
- चेकबुक: 1
- आधार कार्ड: 5
- सिम कार्ड: 12
- माइक्रो एसडी कार्ड: 1
- नोटबुक: 25
- एयरटेल पेमेंट बैंक के स्मार्ट स्पीकर और रिसीवर उपकरण: 2
- ड्राइविंग लाइसेंस: 3
- एनपीएस प्राण कार्ड: 1
- पैन कार्ड: 8
- बाइक: 1
इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस इनकी भूमिका और संभावित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
पलामू और गढ़वा से जुड़े हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में रितिक सिंह, अजीत मेहता उर्फ अजित कुशवाहा, सूरज सिंह, अमनदीप कुमार, सूरजदेव कुमार, अमित रजन, अविनाश, राजकमल वर्मा, रंजीत कुमार और सत्यम वर्मा शामिल हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में दस पलामू जिले के विभिन्न इलाकों के रहने वाले हैं, जबकि एक आरोपी गढ़वा जिले का निवासी है। गिरफ्तार लोगों में एक नाबालिग भी शामिल बताया गया है।
पुलिस की जांच जारी, नेटवर्क के और राज खुलने की संभावना
रांची पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर ठगी के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। हालांकि, इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया, कुल कितनी रकम की ठगी हुई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
पुलिस बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। साथ ही गिरोह के कथित मास्टरमाइंड, डेटा उपलब्ध कराने वाले लोगों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
फिलहाल रांची में साइबर ठगी के इस कथित सिंडिकेट के पर्दाफाश के बाद पुलिस की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।












