बरसात में गांव का संपर्क होता है प्रभावित, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना बन जाता है चुनौती, ग्रामीणों ने स्थायी पुल निर्माण की उठाई मांग
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। प्रखंड मुख्यालय से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित गिधनिया-मसरीतरी गांव में बरसात दस्तक देते ही जिंदगी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। तीन तरफ से नदियों से घिरे इस सुदूरवर्ती गांव के करीब 30 परिवार आज भी स्थायी पुल के अभाव में सुरक्षित आवागमन की सुविधा से वंचित हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से प्रभावित हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है, जिन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए उफनती धारा के बीच से होकर विद्यालय जाना पड़ता है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई बच्चे अपनी साइकिल कंधे पर उठाकर पानी के बीच से नदी पार करते हैं। नदी के दूसरे छोर पर पहुंचने के बाद वे साइकिल लेकर आगे विद्यालय की ओर रवाना होते हैं। लगातार बारिश और तेज बहाव के बीच बच्चों का इस तरह नदी पार करना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
बरसात आते ही बढ़ जाती है गांव की मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार बारिश शुरू होते ही नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है। पानी अधिक बढ़ जाने पर गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से काफी हद तक प्रभावित हो जाता है। दैनिक मजदूरी, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बाहर निकलने वाले ग्रामीणों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। तेज बहाव के कारण नदी पार करना मुश्किल हो जाता है और समय पर स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चुनौती बन जाता है।
जलस्तर बढ़ने पर नदी किनारे फंस जाते हैं बच्चे
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने पर कई बार बच्चे नदी किनारे ही फंस जाते हैं। पानी कम होने का इंतजार करने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी अभिभावक चिंतित रहते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से गांव के लोग सुरक्षित आवागमन के लिए स्थायी पुल की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
सर्पदंश की घटना के बाद और बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में सर्पदंश की एक घटना में एक मासूम की मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार दुर्गम रास्ते और नदी के कारण समय पर उपचार के लिए पहुंचने में परेशानी हुई थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में कुछ मिनट भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन पुल और सुगम सड़क संपर्क के अभाव में मरीजों को समय पर उपचार दिलाना कठिन हो जाता है।
बच्चों की शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का अभाव केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर गांव के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा के जीवन पर पड़ रहा है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद विद्यालय जाने वाले बच्चों के सामने सबसे बड़ा सवाल सुरक्षित तरीके से नदी पार करने का होता है।
ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। इसी तरह मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी हर मौसम में अस्पताल तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता होना आवश्यक है।
बड़े हादसे का इंतजार नहीं, अब स्थायी समाधान की मांग
गिधनिया-मसरीतरी के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव को मुख्य सड़क और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने के लिए नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात में समस्या सामने आती है, लेकिन समाधान के लिए ठोस पहल नहीं हो पाती।
ग्रामीणों ने कहा कि किसी बड़े हादसे के बाद व्यवस्था बनाने के बजाय समय रहते समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि स्थायी पुल बनने से करीब 30 परिवारों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच भी आसान होगी।
उफनती नदी के बीच साइकिल कंधे पर उठाकर स्कूल जाते बच्चों की तस्वीर आज भी यही सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर सुरक्षित रास्ते के लिए इन ग्रामीणों को और कितना इंतजार करना पड़ेगा।








