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विष्णुगढ़: 2014 से रमुआ में गूंज रहा गणपति बप्पा मोरया, 12वें वर्ष में प्रवेश करेगा गणेशोत्सव, 14 सितंबर से पांच दिन भक्तिमय रहेगा माहौल

वर्ष 2014 से चली आ रही सार्वजनिक गणपति पूजा इस वर्ष 12वें वर्ष में प्रवेश करेगी। 14 सितंबर से पांच दिनों तक पूजा, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा...
Published: Sep 4, 2026 10:53 AM  •  Updated: Sep 4, 2026 10:53 AM
HIGHLIGHTS
  • रमुआ में 2014 से चली आ रही गणपति पूजा
  • 14 सितंबर से शुरू होगा पांच दिवसीय गणेशोत्सव
  • मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम बढ़ाएंगे उत्सव की रौनक
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गणपति पूजा की तैयारियों में जुटी समिति, आकर्षक विद्युत सज्जा, भव्य प्रतिमा, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहेंगे विशेष आकर्षण

विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। जैसे-जैसे गणेश पूजा की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रखंड के बेड़ा हरियारा पंचायत अंतर्गत रमुआ गांव में उत्सव का रंग गहराने लगा है। गांव में एक बार फिर ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष की गूंज सुनाई देने वाली है। वर्ष 2014 से चली आ रही सार्वजनिक गणपति पूजा की परंपरा इस वर्ष 12वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। 14 सितंबर 2026 से पांच दिवसीय गणपति पूजा की शुरुआत होगी। पूजा को लेकर सार्वजनिक गणपति पूजा समिति के सदस्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जी-जान से जुटे हुए हैं।

डीएमटी क्लब विष्णुगढ़ की पहल पर वर्ष 2014 में शुरू हुआ यह गणेशोत्सव अब रमुआ गांव की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान के साथ मेला, बच्चों के नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

2014 में रखी गई थी गणेशोत्सव की नींव

वर्ष 2014 में डीएमटी क्लब विष्णुगढ़ द्वारा सार्वजनिक गणपति पूजा समिति का गठन किया गया था। समिति के अध्यक्ष शंकर कुमार बनाए गए थे। इसी वर्ष रमुआ गांव स्थित ग्राम देवी मंडप परिसर में मिट्टी से निर्मित भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित कर पांच दिवसीय सार्वजनिक गणपति पूजा की शुरुआत की गई थी।

उस समय शुरू हुई पूजा की यह परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही। वर्षों के दौरान ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ती गई और गणपति उत्सव ने एक बड़े सामुदायिक आयोजन का रूप ले लिया। अब 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणपति उत्सव को लेकर समिति के सदस्य तैयारियों में जुटे हैं।

तैयारियों में जुटे समिति के सदस्य, सजने लगा पूजा परिसर

गणपति पूजा की तैयारियों को लेकर समिति के सदस्य जी-जान से लगे हुए हैं। पूजा पंडाल को आकर्षक रूप देने के साथ आसपास के परिसर की सजावट, विद्युत व्यवस्था और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समिति की कोशिश है कि पांच दिनों तक रमुआ आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक एवं सांस्कृतिक माहौल मिल सके।

गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमा स्थापना के साथ पूजा स्थल पर आकर्षक विद्युत सज्जा की जाएगी। शाम ढलते ही रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता पूजा परिसर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। पूजा के दौरान विधि-विधान के साथ गणपति महाराज की आराधना की जाएगी।

मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम बढ़ाएंगे उत्सव की रौनक

गणपति पूजा के दौरान रमुआ में मेले का भी आयोजन होगा। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों के पहुंचने की उम्मीद है। बच्चों के लिए नृत्य कार्यक्रम तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय बच्चों और प्रतिभाओं को अपनी कला एवं हुनर प्रदर्शित करने का मंच भी मिलेगा।

पांच दिनों तक पूजा परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहेगी। गणपति बप्पा के जयघोष, पूजा-अर्चना, विद्युत सज्जा, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से रमुआ का माहौल पूरी तरह उत्सवी नजर आएगा।

करीब छह लाख रुपये तक खर्च होता है आयोजन में

सार्वजनिक गणपति पूजा समिति की ओर से आयोजन को भव्य रूप देने के लिए करीब छह लाख रुपये तक खर्च किए जाते हैं। समिति और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से पूजा, पंडाल, सजावट, विद्युत व्यवस्था, मेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां की जाती हैं।

सिर्फ पूजा नहीं, सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक

रमुआ का गणपति उत्सव अब सिर्फ पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा है। यह धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक सहभागिता का भी माध्यम बन चुका है। आयोजन के दौरान ग्रामीण एकजुट होकर तैयारियों में सहयोग करते हैं। नई पीढ़ी भी उत्सव से जुड़कर अपनी संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने में सहभागिता निभा रही है।

वर्ष 2014 में शुरू हुई गणपति पूजा की यह परंपरा अब 12वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। पांच दिनों तक रमुआ में आस्था, उमंग और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। समिति की तैयारियों के बीच अब ग्रामीणों को उस दिन का इंतजार है, जब गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना के साथ एक बार फिर गूंज उठेगा- ‘गणपति बप्पा मोरया।’

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