बरसात में बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार कराने की मजबूरी, मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी बनी बड़ी चुनौती, वर्षों से पुल की आस
विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। विकास की रफ्तार और गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के दावों के बीच विष्णुगढ़ प्रखंड के सुदूरवर्ती इलाकों की तस्वीर अब भी कई सवाल खड़े करती है। करगालो पंचायत के पिपरातिलहा टोला में खोंगिया नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीण वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही चार गांवों के लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं।
पिपरातिलहा के साथ जारवाटांड़, महुआटांड़ और कोंडरागढ़ा के ग्रामीणों का आवागमन भी इसी नदी से होकर होता है। सामान्य दिनों में लोग किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश में पानी बढ़ने और नदी के बहाव तेज होने पर रास्ता जोखिमपूर्ण हो जाता है। इसके बावजूद ग्रामीणों के पास आवागमन का कोई स्थायी और सुरक्षित विकल्प नहीं है।
बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार कराने की मजबूरी
पुल के अभाव का सबसे दर्दनाक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बरसात में नदी में पानी बढ़ने पर अभिभावक छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार कराने को मजबूर होते हैं, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। इस समस्या से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति बच्चों को कंधे पर लेकर नदी पार करता दिखाई दे रहा है।
नदी पार करते बच्चों की यह तस्वीर ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या की गंभीरता को सामने रखती है। अभिभावकों के सामने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और उनकी सुरक्षा, दोनों की चिंता एक साथ बनी रहती है।
बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना चुनौती
खोंगिया नदी पर पुल का अभाव केवल विद्यार्थियों की समस्या नहीं है। बरसात के दिनों में बाजार, रोजगार, सरकारी कार्यालय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में ग्रामीणों को काफी कठिनाई होती है। सबसे गंभीर स्थिति तब होती है, जब किसी बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है।
जलस्तर बढ़ने के बाद नदी पार करना कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पुल का निर्माण होने से वर्षभर सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

डेढ़ सौ से अधिक आबादी, वर्षों से पुल की प्रतीक्षा
ग्रामीणों के अनुसार पिपरातिलहा टोला में डेढ़ सौ से अधिक लोगों की आबादी है। इसके अलावा जारवाटांड़, महुआटांड़ और कोंडरागढ़ा के लोग भी इस रास्ते पर निर्भर हैं। ग्रामीण लंबे समय से खोंगिया नदी पर पुल या पुलिया निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर पूर्व मांडू विधायक को लिखित आवेदन भी दिया गया था। वर्तमान जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी कई बार समस्या रखी गई, लेकिन अब तक पुल निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी है।
पुल बना तो कई इलाकों से जुड़ जाएगा सीधा संपर्क
ग्रामीणों के मुताबिक खोंगिया नदी पर पुल बनने से चार गांवों के साथ आसपास के कई क्षेत्रों का संपर्क भी मजबूत होगा। नदी के दूसरी ओर गुजरने वाली पक्की सड़क से सीधा जुड़ाव होने पर सारूकुंदर, फाराचांच, मड़मो, गाल्होवार और पेंक क्षेत्र की ओर आवागमन आसान होगा। वहीं दूसरी ओर बनासो और विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय तक पहुंच भी सुगम हो जाएगी।
पुल बनने से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल, विद्यालय, प्रखंड कार्यालय और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सहूलियत होगी। विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों के लिए यह पुल पूरे वर्ष सुरक्षित आवागमन का माध्यम बन सकता है।
हर बरसात में वही सवाल—आखिर कब बनेगा पुल?
ग्रामीणों की पीड़ा यह है कि हर साल बरसात आते ही खोंगिया नदी उनके सामने बड़ी बाधा बनकर खड़ी हो जाती है। वर्षों से मांग और आवेदन के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से खोंगिया नदी पर जल्द से जल्द मजबूत पुल का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर स्थायी समाधान चाहिए।

पिपरातिलहा में कंधों पर बच्चों को बैठाकर उफनती नदी पार कराने की तस्वीर इस पूरे क्षेत्र की जमीनी हकीकत को बयां करती है। खोंगिया नदी पर पुल इन चार गांवों के लिए महज एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, मरीजों की स्वास्थ्य सुविधा, ग्रामीणों के रोजगार और सुरक्षित आवागमन से जुड़ी वर्षों पुरानी जरूरत है।








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