चौपारण (हजारीबाग)। झारखंड के सहायक अध्यापकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और अपेक्षाओं का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है। सहायक अध्यापकों का कहना है कि पिछले करीब 25 वर्षों से वे राज्य की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सरकार के विभिन्न कार्यों में कदम से कदम मिलाकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान, सुविधाएं और वेतनमान नहीं मिल पाया है।
सहायक अध्यापकों का आरोप है कि सरकारें बदलती रहीं, घोषणाएं होती रहीं, लेकिन उनकी मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि झारखंड के मूलवासी, आदिवासी एवं खांटी झारखंडी सहायक अध्यापक आज भी सरकार की नीतियों की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।
मेडिकल और शैक्षणिक सुविधाओं का भी उठाया सवाल
सहायक अध्यापकों ने कहा कि उन्हें ऐसी कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जो लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले शिक्षकों को मिलनी चाहिए। मेडिकल सुविधा से लेकर बच्चों की बेहतर शिक्षा, परिवार की जरूरतों और भविष्य की सुरक्षा तक कई मोर्चों पर वे आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि सीमित आय में परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना, बीमारी के समय इलाज कराना और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। कई सहायक अध्यापक अपनी बेटियों की शादी जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए जमीन तक बेचने को मजबूर हो रहे है या होने का दावा कर रहे हैं।
शिक्षक दिवस पर सरकार से वेतनमान की घोषणा की मांग
राज्य के सहायक अध्यापकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि शिक्षक दिवस को केवल औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इस अवसर पर उनके लिए ठोस निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि सरकार यदि वास्तव में शिक्षकों का सम्मान करना चाहती है तो सहायक अध्यापकों के लिए वेतनमान और आवश्यक सुविधाओं की घोषणा अवश्य करें। उनका कहना है कि उम्र का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों का भविष्य बनाने में बीत चुका है। अब समय है कि सरकार उनके बचे हुए जीवन को आर्थिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और परिवार के भविष्य की चिंता से मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
अध्यक्ष रामावतार प्रजापति ने कहा
सहायक अध्यापक रामावतार प्रजापति ने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान का दिन है, लेकिन सहायक अध्यापकों के लिए यह दिन अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने और सरकार के निर्देशों का पालन करने के बावजूद सहायक अध्यापक अपेक्षित सम्मान और सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि सहायक अध्यापकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए वेतनमान लागू करने की दिशा में ठोस निर्णय लिया जाए।
सचिव सीताराम यादव ने जताई नाराजगी
सहायक अध्यापक सीताराम यादव ने कहा कि वर्षों की सेवा के बाद भी सहायक अध्यापकों को आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यों को धरातल पर उतारने में सहायक अध्यापक लगातार अपनी भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी समस्याओं का समाधान अब तक पूरी तरह नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षक दिवस पर सहायक अध्यापकों के हित में बड़ी घोषणा करनी चाहिए, ताकि शिक्षक अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को लेकर सुरक्षित महसूस कर सकें।
राज्य पीओ बच्चू कुमार राणा ने उठाई आवाज
राज्य पीओ बच्चू कुमार राणा ने कहा कि सहायक अध्यापक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग को सहायक अध्यापकों की समस्याओं को केवल मांग के रूप में नहीं, बल्कि उनके अधिकार और सम्मान से जुड़े विषय के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से बेहतर शिक्षा व्यवस्था की उम्मीद तभी की जा सकती है, जब शिक्षकों को भी सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा मिले। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि शिक्षक दिवस के अवसर पर सहायक अध्यापकों के लिए वेतनमान, मेडिकल सुविधा और अन्य आवश्यक लाभों को लेकर सकारात्मक एवं ठोस पहल की जाए।
अब घोषणा नहीं, समाधान की उम्मीद
सहायक अध्यापकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक सरकार और विभाग के साथ सहयोग करते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। अब उनकी उम्मीद है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर सरकार उनके संघर्ष और योगदान को समझते हुए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेगी। सहायक अध्यापकों की मांग है कि उन्हें सम्मानजनक वेतनमान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर विद्यालयों में बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें। शिक्षक दिवस पर सहायक अध्यापकों की यह आवाज अब सरकार के फैसले की ओर देख रही है-क्या इस बार मिलेगा सम्मान, अधिकार और वेतनमान?
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