लिथियम भंडार की पुष्टि के बाद बढ़ी गतिविधियां, वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई, पूरे नेटवर्क की जांच जारी
तिसरी (Giridih) / मनोज लाल बर्नवाल: तिसरी प्रखंड के सुदूरवर्ती असुरहाडी गांव की पहाड़ियां इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में इस क्षेत्र में लिथियम के विशाल भंडार मिलने की पुष्टि होने के बाद यह इलाका सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी सौंप दी गई है।
- लिथियम भंडार की पुष्टि के बाद बढ़ी गतिविधियां, वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई, पूरे नेटवर्क की जांच जारी
- वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
- तिसरी बना अवैध पत्थरों का डंपिंग प्वाइंट
- जांच से बचने के लिए अपनाया जा रहा नया तरीका
- पहले भी दो लोगों की जान जा चुकी हैं
- वनपाल ने कहा- सूचना सही, जांच जारी
- रेंजर बोले- विशेष टीम करेगी जांच
इसी बीच आरोप है कि इस बहुमूल्य खनिज क्षेत्र पर अब अवैध खनन माफियाओं की नजर पड़ गई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले एक माह से असुरहाडी की पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर अवैध बैरल पत्थर उत्खनन किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यहां से निकाले जा रहे बहुमूल्य बैरल पत्थर की तस्करी के जरिए बाहरी राज्यों तक पहुंचाया जा रहा है।
वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है। गांवां बीट के वनपाल राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि वन भूमि पर अवैध माइका एवं पत्थर उत्खनन की सूचना जांच में सही पाई गई। इसके बाद लदबेदवा निवासी धर्मेंद्र साव के खिलाफ प्रतिवेदन संख्या 61/23, दिनांक 20 जुलाई 2026 के तहत वन अधिनियम की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। विभाग का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और अन्य संलिप्त लोगों की भी पहचान की जा रही है।
तिसरी बना अवैध पत्थरों का डंपिंग प्वाइंट
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि असुरहाडी से निकाले गए पत्थरों को पहले तिसरी लाकर अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जाता है। इसके बाद कोडरमा के रास्ते अन्य राज्यों तक भेजा जाता है। कुछ स्थानीय लोगों ने एक अस्पताल संचालक का नाम भी इस पूरे नेटवर्क से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। हालांकि इस संबंध में अभी किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जांच से बचने के लिए अपनाया जा रहा नया तरीका
ग्रामीणों के अनुसार, अवैध खनन करने वाले लोग प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए खदान के मुहानों को लकड़ी, तिरपाल और मिट्टी से ढंक देते हैं। अधिकारियों के लौटने के बाद दोबारा खुदाई शुरू कर दी जाती है। इससे जांच एजेंसियों को वास्तविक स्थिति तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
पहले भी दो लोगों की जान जा चुकी हैं
असुरहाडी की यह खदान पहले भी कई कारणों से चर्चा में रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में मिट्टी धंसने की घटना में एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब पांच वर्ष पहले तत्कालीन खोरीमहुआ अनुमंडल पदाधिकारी रविशंकर विद्यार्थी ने छापेमारी कर तीन बोरी बैरल पत्थर जब्त किए थे।
वनपाल ने कहा- सूचना सही, जांच जारी
वनपाल राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि असुरहाडी भले ही तिसरी प्रखंड में स्थित है, लेकिन संबंधित वन भूमि गांवां बीट के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन की सूचना सत्य पाई गई है और मुख्य आरोपी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
रेंजर बोले- विशेष टीम करेगी जांच
वन विभाग के रेंजर ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जल्द ही विशेष टीम गठित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांवां वन क्षेत्र में माइका, क्रशर पत्थर या किसी भी बहुमूल्य खनिज का अवैध उत्खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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