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राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष: सरदार पटेल के अखंड भारत के सपने को साकार करने का संकल्प

Published: Oct 30, 2026 5:34 PM  •  Updated: Oct 30, 2026 5:34 PM
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राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष: सरदार पटेल के अखंड भारत के सपने को साकार करने का संकल्प

31 अक्टूबर को मनाई जाएगी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती, देशभर में होंगे राष्ट्रीय एकता से जुड़े कार्यक्रम

 

संपादकीय |

 

पटना। देशभर में 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाएगा। यह दिन भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के रूप में भी विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2026 में उनकी 151वीं जयंती के अवसर पर देश उन्हें याद करते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लेगा।

 

सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश की 500 से अधिक देशी रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके दृढ़ नेतृत्व, राजनीतिक दूरदर्शिता और कूटनीतिक कौशल के कारण भारत एक मजबूत राजनीतिक और प्रशासनिक इकाई के रूप में स्थापित हो सका। तत्कालीन रियासत विभाग के सचिव वी.पी. मेनन के सहयोग से उन्होंने देशी रियासतों के भारत में विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। हैदराबाद और जूनागढ़ जैसी जटिल चुनौतियों का समाधान भी इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा।

 

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डॉ. साकेत कुमार पाठक
ज्योतिषाचार्य सह शिक्षाविद्

 

सरदार पटेल का योगदान केवल रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था। उन्होंने विविध भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाले देश को एक साझा राष्ट्रीय पहचान के सूत्र में बांधने का प्रयास किया। खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली आंदोलन के माध्यम से उन्होंने किसानों को संगठित कर जनशक्ति की ताकत का परिचय दिया। बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद ही उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।

 

राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। इसका उद्देश्य नागरिकों के बीच एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर देशभर में रन फॉर यूनिटी, एकता की शपथ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।

 

वर्तमान समय में राष्ट्रीय एकता के सामने सामाजिक भेदभाव, जातिगत असमानता, धार्मिक कट्टरता, क्षेत्रीय संकीर्णता और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाएं बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में आपसी विश्वास, सद्भाव और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार को बढ़ावा देना आवश्यक है। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि अलग-अलग विचार रखने वाले नागरिक एक-दूसरे के अधिकारों और सम्मान का आदर करें।

 

राष्ट्रीय एकता का अर्थ एकरूपता नहीं, बल्कि विविधताओं के बीच एकजुटता है। भारत की ताकत उसकी बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक पहचान में निहित है। संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान प्रदान कर इस एकता को मजबूत आधार दिया है। इसलिए संविधान के मूल्यों, कानून के शासन और सामाजिक न्याय की रक्षा करना भी राष्ट्रीय एकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

देश के विकास में युवाओं की भूमिका भी अहम है। शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और समान अवसरों के माध्यम से युवा देश की एकता और प्रगति को नई दिशा दे सकते हैं। वहीं, सोशल मीडिया के दौर में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करे और समाज में नफरत फैलाने वाली सामग्री से दूर रहे।

 

सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण दृढ़ इच्छाशक्ति, संगठन, आपसी विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी से होता है। गुजरात में स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी उनके योगदान का प्रतीक है, लेकिन उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने से ही संभव है।

 

31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशवासियों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करेंगे। यही लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और उनके अखंड भारत के सपने को आगे बढ़ाने का सबसे सार्थक प्रयास होगा।

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