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निशा भगत के परिजनों से मिले बाबूलाल मरांडी, बोले– आत्महत्या मामले की हो CBI जांच

Published: Nov 7, 2026 9:04 PM  •  Updated: Nov 7, 2026 9:05 PM
HIGHLIGHTS
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गुमला में पीड़ित परिवार से मुलाकात कर जताई संवेदना, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

गुमला। झारखंड की आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले को लेकर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी निशा भगत के घर गुमला पहुंचे। यहां उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मरांडी ने निशा भगत की मौत के मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि किसी की संलिप्तता या लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

चार माह पहले भी दर्ज कराई गई थी शिकायत

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाबूलाल मरांडी ने बताया कि निशा भगत को पहले से धमकियां मिलने की बात सामने आई थी। करीब चार महीने पहले पिठोरिया स्थित उनके घर में लूटपाट की घटना को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मरांडी ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने समय पर ठोस कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की की गिरफ्तारी की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।

फेसबुक लाइव के बाद हुई थी मौत

जानकारी के अनुसार, निशा भगत ने 6 नवंबर को रांची स्थित अपने आवास से फेसबुक लाइव किया था। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर सरकार, प्रशासन और जमीन से जुड़े कुछ लोगों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। इसके कुछ समय बाद उनके निधन की खबर सामने आई।

इस घटना के बाद उनके परिजनों ने भी साजिश की आशंका जताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। उनकी मां देविका भगत ने बेटी को न्याय दिलाने की मांग उठाई है।

टावर चौक पर प्रदर्शन, न्याय की उठी आवाज

निशा भगत की मौत के बाद गुमला में लोगों का आक्रोश भी देखने को मिला। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग उनके शव के साथ टावर चौक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपितों की गिरफ्तारी और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। इसके बाद शव को उनके पैतृक गांव उरू ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया होनी थी।

आदिवासी समाज में घटना को लेकर चिंता

निशा भगत की मौत के बाद आदिवासी समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का दबाव या पक्षपात न हो। उन्होंने दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

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