वर्षों तक शिक्षा सेवा देने वाले सहायक अध्यापकों के भविष्य को सुरक्षित करने की उठी आवाज, पेंशन और आर्थिक सुरक्षा की भी मांग
रांची। झारखंड के सेवानिवृत्त पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) को सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने राज्य सरकार से मांग की है कि सेवानिवृत्ति के बाद प्रत्येक पारा शिक्षक को पांच लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। इसके साथ ही नियमित मासिक पेंशन की व्यवस्था भी लागू की जाए।
संघर्ष मोर्चा का कहना है कि राज्य के पारा शिक्षकों ने वर्षों तक सरकारी विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दिया है। कई शिक्षकों ने बेहद कम मानदेय पर लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ना चिंता का विषय है।
मोर्चा ने सरकार से आग्रह किया है कि पारा शिक्षकों की वर्षों की सेवा को ध्यान में रखते हुए उनके लिए सम्मानजनक सेवानिवृत्ति लाभ सुनिश्चित किया जाए। पांच लाख रुपये की एकमुश्त सहायता मिलने से सेवानिवृत्त शिक्षकों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
इसके अलावा संघर्ष मोर्चा ने पारा शिक्षकों के लिए मासिक पेंशन, कल्याण कोष का प्रभावी संचालन तथा सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठाई है।
गौरतलब है कि पारा शिक्षकों के लिए कल्याण कोष और सेवानिवृत्ति लाभ का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। अब एक बार फिर पांच लाख रुपये की सहायता और पेंशन की मांग ने राज्य में पारा शिक्षकों के भविष्य की सुरक्षा का सवाल सामने ला दिया है।







