राँची। त्योहारों के बीच केंद्र सरकार ने झारखंड को 3,660 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की है। यह रकम केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के तौर पर दी गई है। खास बात यह है कि यह राशि राज्य को मिलने वाले नियमित मासिक भुगतान से अलग है। केंद्र ने देश के सभी 28 राज्यों को मिलाकर कुल 1,09,019 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसका मकसद राज्यों को विकास योजनाओं पर खर्च बढ़ाने और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को गति देने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 31 अक्टूबर को जारी की गई यह राशि वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को दी गई दूसरी अतिरिक्त किस्त है। केंद्र सरकार ने त्योहारों के मद्देनजर राज्यों को यह रकम अग्रिम रूप से उपलब्ध कराई है, ताकि विकास कार्यों के लिए धन की कमी न हो और जरूरी योजनाओं पर खर्च तेज किया जा सके।
झारखंड को कहां खर्च करनी होगी राशि?
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी से मिली इस रकम का इस्तेमाल राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकती है. इससे सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं पर खर्च करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, झारखंड सरकार इस राशि को किन योजनाओं में कितना खर्च करेगी, इसका अलग-अलग ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
यूपी को सबसे ज्यादा, बिहार को 10,845 करोड़
केंद्र की ओर से जारी राशि में उत्तर प्रदेश को 19,208 करोड़ रुपये मिले हैं, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक हैं. बिहार को 10,845 करोड़ और मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़, महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ और राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये मिले हैं। झारखंड को 3,660 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि छत्तीसगढ़ को 3,602 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं

नियमित राशि के अलावा मिला अतिरिक्त पैसा
केंद्रीय करों में हिस्सेदारी वह राशि है, जो केंद्र सरकार अपने कर राजस्व का निर्धारित हिस्सा राज्यों को देती है। इससे राज्य सरकारों को अपनी जरूरतों के मुताबिक योजनाएं चलाने और विकास कार्यों के लिए धन मिलता है। इस बार जारी की गई अतिरिक्त किस्त से राज्यों को नियमित मासिक राशि के अलावा और संसाधन मिले हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि इस राशि से राज्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों में तेजी लाएंगे और कल्याणकारी योजनाओं के लिए खर्च बढ़ा सकेंगे। केंद्र का मानना है कि राज्यों के स्तर पर खर्च बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।






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