सीएम हेमंत सोरेन ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा– जरूरतमंदों की मदद नहीं हुई तो बैंकों में पैसा रखने का क्या फायदा
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी एवं विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 1.75 लाख कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में झारखंड सरकार और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य कर्मचारियों को संकट और विपत्ति के समय वित्तीय सहायता एवं सुरक्षा प्रदान करना है।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। करीब डेढ़ साल पहले शुरू की गई इस पहल के तहत अब तक भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और अब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ समझौते किए गए हैं। इन समझौतों से लगभग पौने दो लाख कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है।
बैंकिंग व्यवस्था पर सीएम ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कागजों और फाइलों में बैंकों के कारोबार एवं विकास के आंकड़े भले ही बेहतर दिखाई देते हों, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरतमंदों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि राज्य के दौरे के दौरान कई जगह लोगों की समस्याएं और निराशा देखने को मिलती हैं।
सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब बैंक आम आदमी और जरूरतमंद लोगों की मदद नहीं करेंगे, तो बैंक में पैसा रखने का क्या औचित्य है। उन्होंने बैंकों से अपील की कि वे केवल वेतनभोगी कर्मचारियों तक अपनी सेवाएं सीमित न रखें, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक भी बैंकिंग सुविधाओं का लाभ पहुंचाएं।
पारंपरिक सामाजिक प्रतिनिधियों की सुरक्षा पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने झारखंड की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था से जुड़े मानकी, मुंडा, प्रधान, परगनैत और मुखिया जैसे प्रतिनिधियों के भविष्य एवं आजीविका की सुरक्षा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये लोग ग्रामीण और सामाजिक व्यवस्था को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी विशेष पहल की आवश्यकता है।
हर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में आज भी आर्थिक असमानता और कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि राज्य का हर घर और हर परिवार आर्थिक रूप से मजबूत बने। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि हर समस्या का समाधान बड़ी योजनाओं से ही हो। कई बार छोटी और जरूरत के अनुसार बनाई गई योजनाएं भी लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुआ यह समझौता सरकारी कर्मचारियों को विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ बैंकों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति और अधिक जवाबदेह बनाएगा।








