पूर्व विधायक ने राजदेव यादव के जमीन दावे पर उठाए सवाल, तीन एकड़ जमीन के अधिकार को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग
चौपारण (हजारीबाग)। जमीन विवाद को लेकर चौपारण में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। शनिवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बरही के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव से जुड़े जमीन विवाद को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने संतोष भुईयां की करीब तीन एकड़ जमीन पर कब्जे का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की सरकारी स्तर पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
1935 के कथित हुक्मनामा पर उठाया सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उमाशंकर अकेला ने 1935 के कथित हुक्मनामा को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राजदेव यादव की ओर से दावा किया गया है कि वर्ष 1935 में रामगढ़ राजा द्वारा उनके पिता ननकु महतो के नाम जमीन का हुक्मनामा जारी किया गया था।
पूर्व विधायक ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची का हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय ननकु महतो की उम्र करीब 11 वर्ष थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 1935 में उनकी उम्र लगभग 11 वर्ष थी, तो उनके नाम जमीन का हुक्मनामा किस आधार पर जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि इस दावे से संबंधित पुराने दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच जरूरी है। इससे ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े दावों में वास्तविक तथ्य क्या हैं।
1955 के भूदान आवंटन पर भी सवाल
उमाशंकर अकेला ने वर्ष 1955 के भूदान आवंटन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि वर्ष 1935 में रामगढ़ राजा द्वारा ननकु महतो को तीन एकड़ जमीन दी गई थी, तो वर्ष 1955 में बिहार भूदान यज्ञ समिति की ओर से उसी जमीन का आवंटन संतोष भुईयां के दादा काली भुईयां के नाम कैसे हुआ।
उन्होंने कहा कि करमा क्षेत्र में भूदान समिति द्वारा अन्य लोगों को भी जमीन आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आती रही है। ऐसे में पूरे मामले की जांच सरकारी अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।
पूर्व विधायक ने कहा कि जमीन विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप के बजाय पुराने दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड, खाता-प्लॉट और आधिकारिक नापी के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।

बाउंड्री को लेकर भी दिया जवाब
अपने आवास के बाहर बनी बाउंड्री को लेकर राजदेव यादव द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी उमाशंकर अकेला ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यदि बाउंड्री सरकारी या पीडब्ल्यूडी की जमीन पर होने का दावा किया जा रहा है, तो संबंधित विभाग से इसकी विधिवत नापी करा ली जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी नापी में यदि बाउंड्री सरकारी जमीन पर पाई जाती है, तो वह उसे हटाने के लिए तैयार हैं।
संतोष भुईयां ने बताई अपनी पीड़ा
संतोष भुईयां ने भी जमीन विवाद को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घर से निकाल दिया गया है। संतोष के अनुसार, कुछ लोग उनके पास पहुंचे और उनके साथ मारपीट करने तथा उन्हें वहां से हटा देने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि जमीन विवाद के कारण वह काफी परेशान हैं और पूरे मामले में न्याय चाहते हैं।
वहीं, जमीन से जुड़े दावों और आरोपों की वास्तविकता दस्तावेजों तथा सरकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चौपारण में इस जमीन विवाद को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

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