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बारिश के तेज बहाव में बह गया गीदड़गढ़वा पुल, दर्जनों गांवों का विष्णुगढ़ से संपर्क प्रभावित, सांसद तक पहुंची ग्रामीणों की परेशानी

लगातार बारिश और नदी के तेज बहाव में कुसुम्भा पंचायत के बरहमोरिया-डुमरडीहा मार्ग पर स्थित गीदड़गढ़वा पुल पूरी तरह बह गया...

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HIGHLIGHTS

  • गीदड़गढ़वा पुल तेज बारिश में नींव समेत बह गया
  • दर्जनों गांवों का विष्णुगढ़ से संपर्क प्रभावित
  • सैकड़ों विद्यार्थियों के आवागमन पर बढ़ा संकट
  • ग्रामीणों ने सांसद मनीष जायसवाल तक पहुंचाई समस्या

1995 के आसपास बना था पुल, पिछले वर्ष भी हुआ था क्षतिग्रस्त, इस बार नींव समेत बहा, विद्यार्थियों के आवागमन पर भी संकट

विष्णुगढ़ (हजारीबाग) / राजेश दुबे। लगातार हो रही बारिश ने कुसुम्भा पंचायत के दर्जनों गांवों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बरहमोरिया से डुमरडीहा जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित गीदड़गढ़वा पुल तेज बारिश और नदी के उफान में पूरी तरह बह गया। पुल के बह जाने से इस मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो गया है और दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गीदड़गढ़वा पुल काफी पुराना और लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। करीब 1995 के आसपास निर्मित इस पुल को पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान नुकसान पहुंचा था। ग्रामीणों के मुताबिक उस समय भी पुल की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका। इस वर्ष नदी के तेज बहाव ने पुल को उसकी नींव समेत बहा दिया, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।

दर्जनों गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग प्रभावित

गीदड़गढ़वा पुल आसपास के दर्जनों गांवों के लिए विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था। पुल के बह जाने के बाद ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और बाजार, अस्पताल, सरकारी कार्यालय तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में परेशानी बढ़ गई है।

बरसात के दौरान नदी का जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में समस्या और गंभीर होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था नहीं की गई तो लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है।

सैकड़ों विद्यार्थियों की राह में भी बढ़ी मुश्किल

इस मार्ग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विद्यालयों तक आवागमन करते हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए यह रास्ता महत्वपूर्ण रहा है। पुल बह जाने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

अभिभावकों का कहना है कि बरसात में नदी का तेज बहाव बढ़ने पर बच्चों का आवागमन और कठिन हो सकता है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और वे सुरक्षित तरीके से विद्यालय पहुंच सकें, इसके लिए प्रशासन को जल्द वैकल्पिक रास्ते की सुरक्षित व्यवस्था करनी चाहिए।

मुखिया ने तत्काल सांसद को दी जानकारी

गीदड़गढ़वा पुल बहने की जानकारी मिलने के बाद कुसुम्भा पंचायत के मुखिया दुलार चंद पटेल ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल को पुल की स्थिति की जानकारी दी और समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में पहल का आग्रह किया।

मुखिया की सूचना पर सांसद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार के संबंधित विभाग को पत्र के माध्यम से स्थिति से अवगत कराने तथा आवश्यक पहल करने की बात कही है।

अब मरम्मत नहीं, मजबूत पुल की जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि गीदड़गढ़वा पुल की जर्जर स्थिति पहले से ही चिंता का विषय थी। पिछले वर्ष बारिश में क्षति पहुंचने के बाद भी यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो इस वर्ष पुल के पूरी तरह बह जाने जैसी स्थिति से बचा जा सकता था।

अब पुल के बह जाने के बाद ग्रामीण केवल तात्कालिक मरम्मत नहीं, बल्कि मजबूत और स्थायी पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए पुल का निर्माण ही इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों को वर्षभर सुरक्षित आवागमन उपलब्ध करा सकता है।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। साथ ही स्थायी पुल बनने तक सुरक्षित अस्थायी आवागमन की व्यवस्था कराने का आग्रह किया है, ताकि ग्रामीणों, विद्यार्थियों और मरीजों को बरसात के दौरान आवागमन में परेशानी न हो।

गीदड़गढ़वा पुल का बह जाना केवल एक पुल का क्षतिग्रस्त होना नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी और प्रखंड मुख्यालय से उनके संपर्क पर पड़ा सीधा असर है। अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर टिकी है।

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