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हृदयविदारक: चौपारण प्रखण्ड के इंगुनिया निवासी 21 वर्षीय सीए छात्र निशांत का रांची में हृदयाघात से निधन

Published: Jan 15, 2026 3:58 PM  •  Updated: Apr 8, 2026 3:58 AM
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गरीबी से संघर्ष कर सपनों तक पहुंचा था निशांत, सफलता की दहलीज पर ही थम गई सांसें

चौपारण (हजारीबाग)। चौपारण प्रखण्ड के इंगुनिया गांव निवासी रणधीर सिंह के 21 वर्षीय पुत्र निशांत का गुरुवार सुबह रांची में अचानक हृदयाघात से निधन हो गया। घटना सुबह करीब 8 बजे की बताई जा रही है। निशांत ने हाल ही में सीए फाइनल ईयर में दाखिला लिया था और महज दो दिन पूर्व ही एक कार्यालय जॉइन किया था। जिस उम्र में सपने आकार लेते हैं, उसी उम्र में उसका जीवन अचानक थम गया।

प्रतिदिन की तरह गुरुवार सुबह भी निशांत अपने दोस्तों के साथ मैदान में टहलने निकला था। अचानक वह जमीन पर गिर पड़ा। साथियों ने आनन-फानन में उसे फिरायालाल चौक स्थित सेंट वीटा हॉस्पिटल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

निशांत अत्यंत गरीब और संघर्षशील परिवार से था, लेकिन उसकी मेहनत और मेधा किसी भी अभाव से बड़ी थी। वह पढ़ाई में इतना होनहार था कि विद्यालय से लेकर कॉलेज तक हर कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करता रहा। शिक्षकों के बीच वह अनुशासन, सादगी और प्रतिभा का उदाहरण माना जाता था।

पिता रणधीर सिंह, जो रांची में एक कपड़ा दुकान में मजदूरी कर परिवार चलाते थे, ने अपना पेट काटकर बेटे की पढ़ाई कराई। उन्हें भरोसा हो चला था कि बेटे की कामयाबी से अब परिवार के दुख दूर होंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे को परिवार की उम्मीदों की रीढ़ माना जा रहा था, उसके चले जाने से पूरा परिवार बिखर गया।

परिवार के दादा सद्गुण सिंह और चाचा सुजीत सिंह आज भी दिन-रात खेतों में मेहनत कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। निशांत की असमय मृत्यु ने न केवल एक होनहार छात्र को छीना, बल्कि एक गरीब परिवार से उसका आखिरी सहारा भी छीन लिया।

जैसे ही इस दुखद घटना की सूचना चौपारण प्रखण्ड के इंगुनिया गांव पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन बेसुध हैं, वहीं गांव के लोग निशांत की प्रतिभा, सरल स्वभाव और परिवार की गरीबी को याद कर आंखें नम कर रहे हैं। सच ही कहा जाए तो, मुंह के पास आया निवाला छिन गया—सपनों से भरा एक उज्ज्वल भविष्य समय से पहले बुझ गया।

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