शहर अंचल में 600 से अधिक मामले लंबित, सॉफ्टवेयर में एडिट का विकल्प नहीं होने से आम लोगों की बढ़ी परेशानी
रांची। झारखंड में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया झारभूमि पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण प्रभावित हो रही है। सॉफ्टवेयर में एमएस प्लॉट से संबंधित आवश्यक एडिट विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं। इससे जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री दीपक बिरुआ ने विभागीय अधिकारियों से पांच दिनों के भीतर लिखित रिपोर्ट तलब की है।
शहर अंचल में 600 से अधिक आवेदन लंबित
राजधानी रांची के शहर अंचल समेत जिले के कई अन्य अंचलों में म्यूटेशन के आवेदन निष्पादन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अकेले शहर अंचल में 600 से अधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, झारभूमि पोर्टल में जरूरी तकनीकी विकल्प और एडिट की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से आवेदनों का निष्पादन बाधित हो रहा है। इस कारण आम लोगों को जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए अंचल कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
अंचल अधिकारियों ने विभाग को दी जानकारी
तकनीकी समस्या को लेकर जिले के कई अंचल अधिकारियों ने उपायुक्त के माध्यम से राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को पूरी स्थिति से अवगत कराया है। अधिकारियों ने पोर्टल पर एडिट का विकल्प जल्द बहाल करने की मांग की है, ताकि लंबित आवेदनों का निष्पादन शुरू किया जा सके।

मंत्री ने पांच दिनों में मांगा लिखित जवाब
म्यूटेशन के बढ़ते लंबित मामलों पर मंत्री दीपक बिरुआ ने संज्ञान लेते हुए विभागीय सचिव से बातचीत की है। मंत्री के अनुसार, पीएमयू स्तर पर तकनीकी समस्याओं के कारण दाखिल-खारिज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने विभागीय सचिव को पांच दिनों के भीतर पूरी स्थिति की लिखित रिपोर्ट और समस्या के समाधान से संबंधित जवाब देने का निर्देश दिया है।
अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर तकनीकी खामियों को दूर कर झारभूमि पोर्टल को कब तक दुरुस्त किया जाता है, ताकि आम लोगों को म्यूटेशन की समस्या से राहत मिल सके।







1 thought on “झारभूमि पोर्टल की तकनीकी खामी से हजारों म्यूटेशन आवेदन अटके, मंत्री दीपक बिरुआ ने पांच दिनों में मांगी रिपोर्ट”