रांची। झारखंड में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण में हो रही देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मुकदमों की धीमी सुनवाई पर नाराजगी जताते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की पीठ में मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद जनप्रतिनिधियों से जुड़े कई आपराधिक मामलों का ट्रायल लंबे समय से लंबित है।
गवाहों की पेशी में देरी पर CBI को फटकार
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसियों को दस्तावेज जुटाने में काफी समय लग रहा है। वहीं, गवाहों को समय पर अदालत में पेश कराने को लेकर भी अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई दे रही है।
CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि कई पुराने मामलों में गवाह अपने दर्ज पते पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इस कारण उनकी गवाही कराने और मुकदमों की सुनवाई आगे बढ़ाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।
झारखंड में 11 मामले लंबित
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में सांसदों और विधायकों से जुड़े कुल 11 आपराधिक मामले फिलहाल लंबित हैं। इन मामलों की प्रगति और सुनवाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए हाईकोर्ट ने दो प्रमुख मामलों के संपूर्ण रिकॉर्ड संबंधित निचली अदालतों से तलब किए हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने और उनका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इसके बावजूद झारखंड में मुकदमों की धीमी रफ्तार पर हाईकोर्ट की नाराजगी से साफ है कि अब इन मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और लंबित मुकदमों के निस्तारण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।







